निष्पक्ष चुनाव संसदीय लोकतंत्र की बुनियाद, चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी जरूरी: पदयात्री दल नुक्कड़ सभा में संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा का आह्वान बिल्वाग्राम, 12 अक्टूबर। […]
पदयात्रियों ने लिया लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा का संकल्प – 10वां दिन
जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती पर पदयात्रियों ने लिया लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा का संकल्प “जनता के बीच जाओ और सच बताओ, यही जयप्रकाश नारायण का संदेश था” […]
जंतर-मंतर पर दमन और गिरफ्तारियों के खिलाफ पदयात्रियों की आवाज़ बुलंद – 9वां दिन
जंतर-मंतर पर लोकतंत्र की आवाज़ उठाने वालों के दमन और गिरफ्तारियों के खिलाफ पदयात्रियों ने बुलंद की आवाज़ ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा बर्धमान […]
बच्चे गांधीजी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं – पदयात्रा का 8वां दिन
गांधीजी की बुनियादी शिक्षा के आदर्शों पर चल रहे शिक्षा-निकेतन पहुंचा पदयात्रा दल “बच्चे गांधीजी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं” – सत्यनारायण घोष “आदिवासी समाज की नई पीढ़ी […]
मेमारी, पूर्व वर्धमान पहुंची ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा
प्रेम, शांति और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर मेमारी, पूर्व वर्धमान पहुंची ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा “लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए […]
बंगाल पदयात्रा का 5वां दिन – त्रिवेणी से मोगरा रोड होते हुए खान्यान तक
बुल्ले शाह के गीत से गूंजा पदयात्रा मार्ग, प्रेम और मानवता का संदेश 5 अक्टूबर, खान्यान: गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी […]
शांति और प्रेम का संदेश लेकर निकली पदयात्रा त्रिवेणी पहुंची
‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ 5 अक्टूबर, त्रिवेणी। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम […]
तीसरा दिन – बैरकपुर से चुंचुड़ा तक करीब 26 किलोमीटर की पदयात्रा
भाटपाड़ा में बंगाल पीस सेंटर द्वारा किए जा रहे सांप्रदायिक सद्भाव एवं रचनात्मक पहला से रूबरू हुए पदयात्री बंगाल पीस सेंटर गांधीजी के रचनात्मक काम को आगे बढ़ाते हुए समाज […]
दूसरे दिन बंगाल में गांधी की विरासत के ऐतिहासिक पड़ावों तक पहुंची पदयात्रा
सोदपुर खादी प्रतिष्ठान और बैरकपुर गांधी स्मारक संग्रहालय में हुआ स्वागत “खादी केवल वस्त्र नहीं, आत्मनिर्भरता और श्रम की गरिमा का प्रतीक है; आज खादी उद्योग और कारीगरों की स्थिति […]

