शांति और प्रेम केवल कुछ लोगों की नहीं, पूरी दुनिया की आकांक्षा है” – पदयात्रा का 12वां दिन

शांति और प्रेम केवल कुछ लोगों की नहीं, पूरी दुनिया की आकांक्षा है” – अरविंद अंजुम

“एकजुटता और आपसी सहयोग से ही लोगों की मुश्किलें दूर हो सकती हैं” – बिरेन डेका

घुसकरा, 13 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा अपने बारहवें दिन बिलोग्राम पंचायत भवन से आगे बढ़ते हुए घुसकरा पहुंची। सर्व सेवा संघ एवं अन्य लोकतांत्रिक संगठनों द्वारा आयोजित यह पदयात्रा प्रेम, शांति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है। 16 अक्टूबर को यात्रा शांतिनिकेतन पहुंचेगी। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 15 राज्यों के पदयात्री इसमें शामिल हैं।

स्थानीय आयोजकों का आभार, महाराष्ट्र के साथियों का स्वागत

सुबह 9 बजे पदयात्रा बिलोग्राम पंचायत भवन से आगे बढ़ी। पंचायत प्रधान किशोर राय चौधरी और अन्य स्थानीय आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें सर्वोदय डायरी 2027 तथा महात्मा गांधी की आत्मकथा भेंट की गई।

इस दौरान सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने महाराष्ट्र के लातूर से पदयात्रा में शामिल हुए सोमनाथ रोड़े और उनकी टीम का स्वागत एवं अभिनंदन किया। इसके बाद पदयात्रा नारों और गीतों के साथ आगे बढ़ी। कलकत्ता से आए बिप्लब नायक रास्ते भर लोगों से संवाद करते हुए यात्रा का संदेश साझा करते रहे। दोपहर में यात्रा घुसकरा पहुंची । 

घुसकरा चौक पर आयोजित हुई नुक्कड़ सभा

घुसकरा के चौक पर आयोजित नुक्कड़ सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने कहा कि आज पूरी दुनिया शांति और प्रेम चाहती है, लेकिन युद्ध और हथियारों का कारोबार इस दिशा में बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि दुनिया को हिंसा से बचाने और आपसी सद्भाव को मजबूत करने के उद्देश्य से यह पदयात्रा निकाली गई है।

“संकट के समय एक-दूसरे के साथ खड़ा होना जरूरी” – बिरेन डेका

असम से पदयात्रा में शामिल बिरेन डेका ने असम के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और राज्य की वर्तमान परिस्थितियों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के असम दौरे और वहां के बुनकरों द्वारा उनके स्वागत ने राज्य में स्वतंत्रता आंदोलन को नई प्रेरणा दी। गांधीजी ने असम की सुंदरता और संस्कृति से प्रभावित होकर ‘ब्यूटीफुल असम’ शीर्षक से लेख भी लिखा था।

उन्होंने असम आंदोलन और विदेशी नागरिकों के मुद्दे का उल्लेख करते हुए राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में आए बदलावों पर बात की। असम में आई भीषण बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लाखों लोग प्रभावित हुए और जन-धन तथा पशुधन का भारी नुकसान हुआ। ऐसे कठिन समय में बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों के लोगों और संगठनों ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता की।

बिरेन डेका ने कहा कि इसी एकजुटता से प्रेरित होकर वे पदयात्रा में शामिल हुए हैं। उन्होंने जोर दिया कि जिस तरह संकट के समय विभिन्न राज्यों के लोगों ने असम का साथ दिया, उसी तरह हर परिस्थिति में एक-दूसरे का सहयोग करना और प्रेम, शांति तथा भाईचारे को मजबूत करना जरूरी है।

शिक्षा और लोकतंत्र में समान अवसर की जरूरत- अनूप कुमार

दिल्ली से पदयात्रा में शामिल अनूप कुमार ने बंगाल के शांति-प्रिय लोगों को नमन करते हुए बताया कि वे दिल्ली में नशामुक्ति, शिक्षा, पर्यावरण और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों पर काम करते हैं।

उन्होंने ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के बच्चों के सामने शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी की समस्या उठाई। देश में करोड़ों लोगों की मुफ्त राशन पर निर्भरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने आर्थिक असमानता और आजीविका की चुनौतियों पर चिंता जताई।

उन्होंने चुनावी व्यवस्था में धनबल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण योग्य और प्रतिभाशाली लोग भी चुनाव लड़ने से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने शिक्षा, समान अवसर और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

झारखंड के जमशेदपुर से पदयात्रा में शामिल निधि ने न्याय, शांति और प्रेम का संदेश आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने से समाज में नफरत ही बढ़ती है। इसके बजाय प्रेम, करुणा और आपसी सद्भाव को अपनाना जरूरी है। उन्होंने लोगों से पदयात्रा के साथ जुड़कर शांति और एकता की दिशा में कदम बढ़ाने का आह्वान किया।

मध्य प्रदेश से आई आसमा आदिवासी ने भी पदयात्रा के उद्देश्य और सामाजिक सद्भाव के महत्व को साझा किया।\

घुसकरा हाई स्कूल में पदयात्रियों का स्वागत

पदयात्रा अपने अंतिम पड़ाव घुसकरा हाई स्कूल पहुंची, जहां विद्यालय के पूर्व प्राचार्य श्रीकांत गायकवाड़ ने पदयात्रियों का हार्दिक स्वागत किया। इस अवसर पर पदयात्रा दल के कुछ वरिष्ठ साथियों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

श्रीकांत गायकवाड़ ने कहा कि बदलती परिस्थितियों में भी मानवीय मूल्यों और सामाजिक प्रतिबद्धता को बनाए रखना जरूरी है। समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए सभी को प्रेम, मानवीयता और सहयोग के साथ आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने कहा कि पदयात्रियों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन उनका संदेश नई पीढ़ी, विद्यार्थियों और पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से दूसरों के काम पर सवाल उठाने के बजाय यह सोचने की अपील की कि वे स्वयं समाज के लिए क्या कर सकते हैं।

पदयात्री दल ने श्रीकांत गायकवाड़ को सर्वोदय डायरी 2027 और महात्मा गांधी की आत्मकथा भेंट की।

पदयात्रा में शामिल साथी- बारहवें दिन की पदयात्रा में महाराष्ट्र के सोमनाथ रोड़े, माधव, बालाजी पोम्पलावर, डॉ. अशोक, डॉ. बालाजी, डॉ. गाडेकर और डॉ. घाडगिने सहित अबु सुलेमान, निधि, अलीभा, अनोखेलाल, देबाशीष, बिस्वजीत गोराई, विष्णु, अनूप कुमार, आसमा आदिवासी, कीर्ति, चंदन पाल, बिरेन डेका, सतीश मराठा, जितेन नंदी, श्रीनिवासन, विक्रम पाटिल, बिप्लब नायक, अरविंद अंजुम, इस्तियाक, उमेश तुरी, सुशांत मोहंती, किरण वीर, सतरंजन पाल, शांतू सरदार, राज रानी खोसला, बसीर, सबीना, जगदीश कुमार और विकास कुमार सहित अन्य पदयात्री शामिल रहे।