पदयात्रा के 13वें दिन गोबिंदोपुर और भेदिया में शांति, प्रेम, सद्भाव का संदेश

संविधान की रक्षा और किसानों-मजदूरों को न्याय दिलाना हर नागरिक का कर्तव्य: सोमनाथ रोड़े

भेदिया, पश्चिम बंगाल 14 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को कोलकाता की हैदरी मंजिल से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा तेरहवें दिन घुसकरा से आगे बढ़ते हुए भेदिया पहुँची। सर्व सेवा संघ एवं अन्य लोकतांत्रिक संगठनों द्वारा आयोजित यह पदयात्रा प्रेम, शांति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है। 16 अक्टूबर को यात्रा शांतिनिकेतन पहुँचेगी। इसमें देश के लगभग 15 राज्यों से आए पदयात्री शामिल हैं।

सर्वधर्म प्रार्थना और गीतों के साथ हुई दिन की शुरुआत

यात्रा के अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ते हुए आज बड़ी संख्या में नए पदयात्री इसमें शामिल हुए। नए साथियों का स्वागत किया गया और उन्होंने अपना परिचय दिया। इसके बाद सर्वधर्म प्रार्थना हुई। कोलकाता से आए जितेन नंदी ने कबीर का भजन “उड़ जाएगा हंस अकेला” प्रस्तुत किया।

सुबह 9 बजे पदयात्री नारों और गीतों के साथ आगे बढ़े। कोलकाता से आए बिप्लब नायक रास्ते भर लोगों से संवाद करते हुए पदयात्रा का संदेश साझा करते रहे। दोपहर में यात्रा गोबिंदोपुर पहुँची।

गोबिंदोपुर चौक पर नुक्कड़ सभा

गोबिंदोपुर चौक पर आयोजित नुक्कड़ सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के लातूर से आए सोमनाथ रोड़े ने कहा कि गांधी पदयात्रा का उद्देश्य शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना तथा संविधान की रक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सहित सभी समुदायों को मिलकर देश की एकता और अखंडता के लिए काम करना चाहिए।

किसानों और मजदूरों के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश के निर्माण में आम नागरिकों की मेहनत की अहम भूमिका है, लेकिन आज भी किसानों और मजदूरों को उचित सम्मान और न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने ऐसे भारत के निर्माण पर जोर दिया, जहाँ हर नागरिक को न्याय, सम्मान और बेहतर जीवन मिल सके।

सोमनाथ रोड़े ने कहा कि पदयात्रा जनता के सहयोग से चल रही है, किसी सरकार के सहयोग से नहीं। उन्होंने लोगों से यात्रा के संदेश को अपने आसपास के लोगों तक पहुँचाने और गांधी तथा डॉ. आंबेडकर के विचारों के आधार पर संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए जागरूक होने की अपील की।

सभा के दौरान बनारस से यात्रा में शामिल हुए नंदलाल मास्टर ने “गाएगा, गाएगा ज़माना गाएगा, गीत एकता का ज़माना गाएगा…” गीत प्रस्तुत किया। उन्होंने जोशपूर्ण नारों के साथ पदयात्रियों का उत्साह भी बढ़ाया। गोबिंदोपुर में भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई थी।

स्थानीय लोगों का मिला समर्थन

दिनभर की यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों का अच्छा समर्थन मिला। रास्ते में बच्चे कुछ देर के लिए पदयात्रा में शामिल हुए और “महात्मा गांधी ज़िंदाबाद” के नारे लगाए। महिला श्रमिक भी यात्रा के संदेश से प्रभावित होकर इसमें शामिल हुईं। विभिन्न समुदायों के लोगों ने पदयात्रियों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

नारों और गीतों के साथ भेदिया पहुँची यात्रा

गोबिंदोपुर से आगे बढ़ने के बाद भेदिया में नुक्कड़ सभा आयोजित हुई। नंदलाल मास्टर ने गीतों और नारों के जरिए पदयात्रियों में उत्साह भरा। इस दौरान नारा गूँजा- “गाँव-गाँव, टोले-टोले, हर मोहल्ले जाना है; गांधी के संदेश को फैलाना है। नफरत को मिटाना है, बंधुत्व को बढ़ाना है।”

शाम 5:30 बजे पदयात्रा भेदिया में दिन के अंतिम पड़ाव पर पहुँची।

पदयात्रा में शामिल साथी

तेरहवें दिन की पदयात्रा में नंदलाल मास्टर, शेख हुसैन, सोमनाथ रोड़े, माधव, बालाजी पोम्पलावर, डॉ. अशोक, डॉ. बालाजी, डॉ. गाडेकर, डॉ. घाडगिने, अबु सुलेमान, निधि, मनोज कुमार, श्यामल मुखर्जी, उमेश प्रसाद, अलीभा, अनोखेलाल, देबाशीष, बिस्वजीत गोराई, विष्णु, अनूप कुमार, शाहिद कमल, आसमा आदिवासी, कीर्ति, चंदन पाल, बिरेन डेका, तरुण, चांद मुहम्मद, सतीश मराठा, जितेन नंदी, श्रीनिवासन, साम्भव, बैद्यनाथ दे, विक्रम पाटिल, बिप्लब नायक, अमिताभ, अरविंद अंजुम, इस्तियाक, उमेश तुरी, सौरभ महापात्रा, सुशांत मोहंती, आयशा खातून, किरण वीर, सतरंजन पाल, सुतापा, शांतू सरदार, राज रानी खोसला, स्नेह कुमार सिंह, पुष्पराज, बसीर, सबीना, जगदीश कुमार और विकास कुमार सहित अन्य पदयात्री शामिल रहे।