जो लोग बंधुत्व की मुहिम चला रहे हैं, वही असली राष्ट्रवादी हैं – पदयात्रा का 10वां दिन

पर्चा हमारा, कब्जा किसी और का नहीं मानेंगे – भूमिहीनों की घोषणा

जो लोग बंधुत्व की मुहिम चला रहे हैं, वही असली राष्ट्रवादी हैं – समुसूद होदा

प्रेस विज्ञप्ति – 19 अप्रैल 2026
नरकटियागंज, पश्चिमी चंपारण


“जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ”
पटना से चंपारण यात्रा (10 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026)

आजादी के आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा एवं उन्हें मजबूत करने के उद्देश्य से “जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ” पटना से चंपारण तक यात्रा निकाली गई है। दसवें दिन की शुरुआत जी.एम. इंग्लिश स्कूल, चनपटिया (पश्चिमी चंपारण) में सुबह सर्वधर्म प्रार्थना के साथ हुई। इसके बाद यात्रा प्रभात फेरी करते हुए चनपटिया चौक तक पहुंची। सुबह 7:30 बजे सीपीआई के जिला सचिव ओम प्रकाश क्रांति ने अपने आवास पर यात्री दल का स्वागत किया तथा जलपान की व्यवस्था की।

इसके बाद यात्रा भाकपा (माले) के कार्यालय गई, जहां यात्री दल का स्वागत किया गया। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने यात्रा के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में फासीवादी शक्तियों के खतरे से निपटने के लिए संयुक्त रूप से काम करने की आवश्यकता है। इस दौरान जिला सचिव कामरेड अरुण के अलावा नजरे आलम, केदार राम, सुरेश द्विवेदी, शमशुल, रामदास मुखिया, संजय गुप्ता और अजीत वर्मा आदि उपस्थित थे।

इसके बाद यात्री दल पश्चिम चंपारण के चांद बरवा गांव पहुंचा, जो स्वतंत्रता सेनानी शेख गुलाब की जन्मभूमि है। शेख गुलाब 20वीं सदी की शुरुआत में नील की खेती के खिलाफ किसानों के संघर्ष के प्रमुख नेताओं में से एक थे। ग्रामीणों ने बताया कि राजकुमार शुक्ल, शीतल राय और शेख गुलाब आपस में घनिष्ठ मित्र थे और अंग्रेजी हुकूमत द्वारा थोपे गए ‘तीनकठिया प्रथा’ को समाप्त करने के लिए प्रयासरत थे।
शेख गुलाब ने 1905 में ही किसानों को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाई। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने साठी फार्म के अंग्रेज मैनेजर को पटक दिया था, जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी।

गांव में उनके योगदान की स्मृतियां आज भी जीवित हैं और स्थानीय लोग उन्हें गर्व के साथ याद करते हैं। यात्री दल से संवाद के दौरान ग्रामीणों ने अब गांव में उनकी स्मृति दिवस मनाने का निर्णय भी लिया। यह यात्रा स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और गुमनाम नायकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी उद्देश्य रखती है।

इसके बाद यात्रा कर्पूरी ठाकुर आश्रम पहुंची, जहां लोक जागरण मंच द्वारा एक जनसभा का आयोजन किया गया था। यात्री दल के अलावा स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत समाजसेवी मोहम्मद सलाउद्दीन के स्मृति दिवस के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

जनसभा का संचालन मानव आश्रम, नरकटियागंज के शत्रुघ्न झा ने किया। उन्होंने बताया कि मोहम्मद सलाउद्दीन रामनगर के विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता थे और लोक जागरण मंच, पश्चिम चंपारण के अध्यक्ष भी रहे थे। वे चंपारण सत्याग्रह, गांधी-विनोबा के ग्राम स्वराज, कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक न्याय के विचारों तथा कौमी एकता को समाज में आगे बढ़ाने के लिए कार्यरत थे। कुछ वर्ष पहले रामनगर में दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसे शांत कराने और सद्भाव स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

महाराष्ट्र के ब्रह्म विद्या मंदिर, पवनार से आईं ज्योति बहन ने अपने वक्तव्य में कहा कि बिहार की भूमि प्राचीन काल से ही अहिंसा और अध्यात्म का केंद्र रही है, जहां महाराज जनक, गौतम बुद्ध और महावीर ने मानवता को शांति और करुणा का संदेश दिया। आधुनिक युग में महात्मा गांधी, विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।उन्होंने कहा कि भूदान आंदोलन, जिसकी शुरुआत पोचमपल्ली से हुई, ने संयुक्त बिहार में लगभग 32 लाख एकड़ भूमि दान के रूप में दिलाई। इसके बावजूद आज भी कई भूमिहीनों को वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया है। इससे स्पष्ट होता है कि केवल भूमि वितरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि पानी, बीज और पशुधन जैसे संसाधनों की उपलब्धता भी आवश्यक है। उन्होंने विनोबा भावे के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भूदान एक प्रवाहमान नदी के समान है, जबकि ग्रामदान और ग्राम स्वराज समग्र विकास का समुद्र हैं, जहां पूरा गांव आत्मनिर्भर बनता है। उन्होंने सर्वधर्म समभाव पर जोर देते हुए कहा कि सभी धर्म मानवता का संदेश देते हैं। गांधी के एकादश व्रत- जैसे अहिंसा, सत्य, त्याग और अपरिग्रह – समाज में नैतिक संतुलन स्थापित करने में सहायक हैं।

सभा में खटौरी पंचायत की मुखिया स्मिता चौरसिया ने कहा कि समाज में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच लंबे समय से बंधुत्व और प्रेम की परंपरा रही है। उनके गांव छघरिया और रामनगर में कभी सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कुछ राजनेता अपने स्वार्थ के लिए समाज में नफरत फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।

स्थानीय समाजसेवी समुसूद होदा ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया माध्यमों द्वारा राष्ट्रवाद को गलत तरीके से परिभाषित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद का अर्थ किसी भी धर्म के लोगों से नफरत करना नहीं है। जो लोग समाज में बंधुत्व को बढ़ाने की मुहिम चला रहे हैं, वही सच्चे राष्ट्रवादी हैं।

इसके अलावा सिस्टर फ्लोरीन, सिराज अहमद, ऊषा बहन और रामधीरज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में सईद सिद्दीकी, प्रभुनाथ कुशवाहा, कुश कुमार शर्मा, इकबाल अहमद आदि भी उपस्थित रहे।

सभा के बाद यात्रा दल ने मुख्य सड़क पर पदयात्रा की। दोपहर में गौरी बहन के यहां दल का स्वागत किया गया तथा भोजन की व्यवस्था की गई।

इसके बाद शाम को यात्रा कटहरवा और तरहरवा गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि उनकी जमीन पर अधिकार को लेकर न्यू स्वदेशी चीनी मिल ने हाई कोर्ट में मामला दायर कर प्रक्रिया को लंबित कर दिया है।
ज्ञात हो कि इस चीनी मिल के पास 1733 एकड़ जमीन सीलिंग से अधिक है, जिसका पर्चा भूमिहीनों को दिया जा चुका है, लेकिन उन्हें अभी तक वास्तविक कब्जा नहीं मिला है।


युवा सामाजिक कार्यकर्ता महेश राम ने बताया कि ग्रामीणों ने चीनी मिल को उस जमीन पर खेती करने से रोक दिया है और फिलहाल जमीन खाली पड़ी है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के निर्णय के बाद ही जमीन का स्वामित्व तय होगा। उन्होंने यह भी बताया कि 24 अप्रैल को इस मामले के समाधान के लिए पश्चिम चंपारण के जिला अधिकारी द्वारा बैठक बुलाई गई है।

यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर स्थानीय आयोजकों को ‘सर्वोदय जगत’ पत्रिका का यात्रा विशेषांक, ‘गांधी दर्शन के तात्विक आधार’ पुस्तक, सर्वोदय डायरी और कस्तूरबा कैलेंडर स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट किए गए।

यात्रा दल में शामिल सदस्य:

यात्रा संयोजक अशोक भारत, सर्व सेवा संघ के सचिव अरविंद अंजुम, उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज, सिस्टर फ्लोरिन, हिमालय विजेता कीर्ति, विकास कुमार, उमेश तूरी, मयूर साखरे, अनूप कुमार, अशोक कुमार सिंह, विष्णु कुमार, पंजाब से सुनील कुमार शर्मा, सिराज अहमद, ज्योति बहन (ब्रह्म विद्या मंदिर, पवनार), जम्मू बहन (गुजरात), जीतेन नंदी (बंगाल), चंद्रमा (कस्तूरबा ट्रस्ट), प्राची बहन (महाराष्ट्र) तथा भावेश (बेतिया) शामिल हैं।