‘जहां पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ – पटना से चंपारण यात्रा शुरू

लोकतंत्र और सद्भाव की विरासत को सहेजने का संकल्प

आज़ादी आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की हिफाज़त और मजबूती के लिए आज सुबह पटना स्थित जयप्रकाश नारायण के निवास स्थल, महिला चरखा समिति में सर्वधर्म प्रार्थना के साथ यात्रा की शुरुआत हुई। इस अवसर पर सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश और दुनिया कई प्रकार की चुनौतियों के सामने खड़े हैं। देश में सूफी-संतों की उदारवादी परंपरा और विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र तथा संवैधानिक मूल्यों को नष्ट करने का सुनियोजित प्रयास चल रहा है। इसी तरह वैश्विक स्तर पर दबदबा कायम करने और प्राकृतिक संसाधनों की लूट की प्रवृत्तियों ने शांति के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक समय यह स्थान भारत के लोकतंत्र की रक्षा का सक्रिय केंद्र बन गया था। हम भी उन्हीं स्मृतियों को संकल्प बनाकर इस यात्रा का प्रारंभ कर रहे हैं। गांधी की प्रेरणा और मूल्य ही विश्व मानवता को स्थापित करने का स्रोत हैं। हम इसी को विरासत मानकर यात्रा में निकल पड़े हैं। ‘जहां पड़े कदम गांधी के’ यात्रा, ‘एक कदम गांधी के साथ’ का विस्तार है। समाज को इस विस्तार का हिस्सेदार बनाना यात्रा का अनन्य लक्ष्य है।

सर्वधर्म प्रार्थना के बाद सुबह 10 बजे यात्री पदयात्रा करते हुए अनुग्रह नारायण सिंह समाज अध्ययन संस्थान पहुँचे। अनुग्रह नारायण सिंह समाज अध्ययन संस्थान, सर्व सेवा संघ एवं प्रदेश सर्वोदय मंडल बिहार के संयुक्त तत्वावधान में ‘गांधी संवाद’ का आयोजन किया गया, जिसका विषय था – ‘चंपारण सत्याग्रह का संदेश और आज का समय’।

वरिष्ठ लेखिका डॉ. सुजाता चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी की पटना से चंपारण तक की यात्रा मात्र एक राजनीतिक आंदोलन नहीं थी, बल्कि सत्य, निष्ठा और आचरण की शुद्धि का एक महान मार्ग थी। यहां गांधी जी ने अपने शुद्ध आचरण से अनुग्रह नारायण सिंह और राजेंद्र प्रसाद जैसे दिग्गज वकीलों को आरामदायक जीवन त्यागकर स्वयं सेवा और सादगी अपनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने रेखांकित किया कि गांधी जी ने न केवल ‘तिनकठिया’ जैसी शोषणकारी व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि समाज के ‘अंतिम जन’ और महिलाओं की दयनीय स्थिति को भी समझा। यहां तक कि तीन स्त्रियों के बीच मात्र एक साड़ी होने की व्यथा सुनकर उन्होंने स्वयं भी न्यूनतम वस्त्र धारण करने का निर्णय लिया। डॉ. सुजाता ने जोर दिया कि राजकुमार शुक्ल जैसे किसानों का संघर्ष हमें सिखाता है कि जब हम पवित्रता और सच्चाई के साथ अन्याय के विरुद्ध खड़े होते हैं, तभी हम वास्तविक स्वतंत्रता और स्वाभिमान प्राप्त कर सकते हैं।

अर्थशास्त्री एवं अनुग्रह नारायण सिंह समाज अध्ययन संस्थान के पूर्व निदेशक डी.एम. दिवाकर ने कहा कि जब महात्मा गांधी चंपारण आए तो उन्होंने अदालत में कहा कि वे न्याय की स्थापना के लिए आए हैं; यदि यह अपराध है, तो इसे वे स्वीकार करते हैं। उन्होंने कार्यकर्ता तैयार करने की मजबूत बुनियाद रखी। बड़े घरों से आए लोगों को भी साधारण कार्यकर्ता की तरह काम करने के लिए प्रेरित किया। किसानों की समस्याओं को सही ढंग से समझने के लिए लगभग 8000 किसानों के लिखित बयान दर्ज किए गए और उनकी कई प्रतियां बनवाई गईं। इन्हीं प्रमाणों के आधार पर अधिकारियों को पत्र लिखा गया। गांधीजी का मानना था कि केवल दावा करने से नहीं, बल्कि साक्ष्य (सबूत) के साथ बात रखनी चाहिए। उनका संघर्ष किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि अन्यायपूर्ण व्यवस्था से था।

उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज ने कहा कि अहिंसा की ताकत से चंपारण में लाखों लोग खड़े हुए। आज फिर लोकतंत्र, आम आदमी, विरासत और संस्थाओं पर खतरा है। जो भी सत्ता के खिलाफ लिखेगा या बोलेगा, उसे दरकिनार करने की कोशिश होगी। ऐसे समय में हर देशवासी को निर्भय होकर अपने अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा करनी चाहिए।

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि गांधीजी ने सभी धर्मों को साथ लेकर चलने की बात कही। उन्होंने कॉरपोरेट संस्कृति के विपरीत सादा जीवन का आदर्श दिया। उनके विचारों में अंत्योदय की भावना और ट्रस्टीशिप का सिद्धांत था। वे निर्भीकता और शांति की बात करते थे- जहाँ शांति का अर्थ भय का अभाव है। उन्होंने सत्याग्रह का मार्ग दिखाया। आने वाले समय में नई तकनीकें, जैसे एआई, भी चुनौतियाँ ला सकती हैं, इसलिए मानवता को बचाने के लिए गांधी के विचार और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

इसके अतिरिक्त श्री गिरिजा सतीश (राष्ट्रीय अध्यक्ष, लोकसमिति) ने कहा कि गांधी ने व्यक्ति और राष्ट्र निर्माण के लिए आदर्श व्रत चुना था, जिसकी शुरुआत चंपारण से हुई।

इसके अलावा सुशील कुमार, कारू, विजेंद्र यादव, रमा रंजन प्रसाद सिंह तथा शाहिद कमान सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।

यात्रा को लेकर सर्वोदय जगत पत्रिका का विशेष अंक प्रकाशित किया गया, जिसका आज विमोचन किया गया। इसके अलावा सर्वोदय जगत के संपादक एवं समाजशास्त्री विमल कुमार द्वारा लिखित किताब ‘गांधी दर्शन के तात्विक आधार’ का भी आज विमोचन हुआ।

‘गांधी संवाद’ का स्वागत यात्रा के आयोजक अशोक भारत ने किया तथा संचालन प्रदीप प्रियदर्शी ने किया।

शाम 4 बजे यात्रा की शुरुआत गांधी शिविर से हुई। इसी जगह पर गांधी 1947 में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए महीनों रुके थे। यात्री पदयात्रा करते हुए आगे पटना कॉलेज के नजदीक पहुंचे, जहां समाजसेवी अंजली और उनकी टीम द्वारा स्वागत किया गया।

यात्रा आगे बढ़ते हुए दिन के अंतिम पड़ाव गांधी घाट पहुंची। वहां राष्ट्रीय युवा योजना की बिहार इकाई और जी.एन. अकादमी से जुड़े नीरज एवं उनकी टीम तथा स्कूली बच्चों ने यात्रियों का जोरदार स्वागत किया। इसके बाद शाम 6 बजे सर्वधर्म प्रार्थना और सभा का आयोजन किया गया।

यात्रा 10 अप्रैल को पटना से शुरू होकर 22 अप्रैल 2026 को गांधी आश्रम, भीतिहरवा (पश्चिम चंपारण) में समाप्त होगी।

आज यात्रा में सतीश गिरिजा, रामधीरज, शेख हुसैन, अरविंद अंजुम, रमण कुमार, प्रदीप प्रियदर्शी, फ्लोरिन, अशोक भारत, कारू, सुशील कुमार, साधना, शिवानी, मयूर, तनु वर्मा, सौरभ, क्रांति रसोस, विकास कुमार, सुनील कुमार शर्मा, सुरेंद्र नारायण सिंह, सत्येंद्र कुमार, चंद्रभूषण, मृत्युंजय कुमार, पंकज कुमार श्रीवास्तव, अदिति शर्मा, अमित रंजन, आशुतोष कुमार मिश्रा, अनीता शरण, दासगीर अली आलम, ललिता आदि शामिल हुए।