सत्ता सवालों से घबराती है, लेकिन सवाल पूछना हर नागरिक का कर्तव्य है – यात्रा का चौथा दिन

सत्ता सवालों से घबराती है, लेकिन सवाल पूछना हर नागरिक का कर्तव्य है- डी. एम. दिवाकर

मुज़फ्फरपुर में जिन-जिन स्थानों पर महात्मा गांधी के कदम पड़े थे, उन सभी ऐतिहासिक स्थलों पर यात्री गए।

प्रेस विज्ञप्ति – 13 अप्रैल 2026
मुजफ्फरपुर 

जहां पड़े पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ
पटना से चंपारण यात्रा
10 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026

आजादी के आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा और उन्हें मजबूत करने के उद्देश्य से “जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ” पटना से चंपारण यात्रा निकाली गई है । आज चौथे दिन सुबह 8 बजे यात्रा मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज के परिसर में स्थित ऐतिहासिक गांधी कूप पहुंची जहां सर्व धर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया । अप्रैल 1917 में महात्मा गांधी चंपारण जाने के क्रम में मुजफ्फरपुर पहुंचे थे। उस समय वे एल.एस. कॉलेज परिसर में ठहरे थे, जहाँ परिसर में स्थित कुएँ में गांधी जी ने स्नान किया था , जिसे अब स्मारक के रूप में बनाया गया है।

प्रार्थना सभा के बाद बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अमरेंद्र नारायण यादव ने बताया कि महात्मा गांधी के चंपारण जाने के क्रम में मुजफ्फरपुर में उनके प्रवास की शताब्दी के अवसर पर उस ऐतिहासिक घटना का पुनर्निर्माण किया गया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की प्रेरणा तब मिली जब एक फिल्म में गांधी जी को सीधे पटना से चंपारण पहुँचते दिखाया गया और मुजफ्फरपुर का उल्लेख नहीं था। इतिहासकार भोज नंदन बाबू और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से इस कार्यक्रम की योजना बनाई गई, जिसमें गांधी जी के गुजरात वाले पहनावे और उस समय की परिस्थितियों को यथासंभव वास्तविक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। जैसे ही समाचार फैला कि गांधी जी के आगमन का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी और ऐसा लगा मानो पूरा उत्तर बिहार वहाँ एकत्र हो गया हो। सौ वर्ष पहले की स्थिति को दर्शाने के लिए छह बैलगाड़ियों का उपयोग किया गया । उन्होंने अप्रैल 1947 का एक प्रसंग साझा किया कि जब गांधी जी मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज के कमरे में ठहरे थे, वहां उस समय जे. बी. कृपलानी मौजूद थे। जब अंग्रेज प्रिंसिपल ने कृपलानी से पूछा कि उन्होंने गांधी को वहाँ क्यों ठहराया, तो कृपलानी ने भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि हमारे यहाँ अतिथि होटलों में नहीं रुकते, और बाद में उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया। अमरेंद्र यादव ने आगे कहा कि आज गांधी को जितना समाज से अलग करने की कोशिश की जाएगी, वे उतना ही अधिक प्रासंगिक होकर सामने आएंगे।

इसके बाद यात्री दल पदयात्रा करते हुए माध्यमिक शिक्षक संघ सभागार, माड़ीपुर पहुंची जहां पर  ‘आजादी की विरासत, लोकतंत्र एवं संविधान’ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का संचालन यात्रा आयोजक अशोक भारत ने किया । गोष्ठी में मुजफ्फरपुर शहर के नामी समाजसेवी, छात्र, अध्यापक बड़ी संख्या में शामिल रहे । कार्यक्रम की शुरुआत में उमेश तूरी एवं सुनील कुमार ने क्रांति गीत प्रस्तुत किए। 

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि मुजफ्फरपुर जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र से गांधीजी के विचारों को आगे बढ़ाने का मजबूत संदेश पूरे समाज तक पहुँच सकता है। यह शहर न केवल लीची की भूमि के रूप में प्रसिद्ध है, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।यहाँ के क्रांतिकारी युवाओं, विशेषकर खुदीराम बोस ने अपने बलिदान से देश की आज़ादी की लड़ाई को नई दिशा दी। मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सद्भाव की जो परंपरा रही है, वह पूरे देश के लिए एक आदर्श है।  गांधीजी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता आंदोलन के समय थे, क्योंकि आज भी समाज को नफरत, डर और संकीर्ण मानसिकता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में मानव मूल्यों और मानवीय बुद्धिमत्ता को बनाए रखना जरूरी है, ताकि तकनीक मानव कल्याण के लिए काम करे, न कि शोषण का साधन बने। 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अर्थशास्त्री एवं अनुग्रह नारायण सिंह समाज अध्ययन संस्थान के पूर्व निदेशक डी. एम. दिवाकर ने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन के बारे में दावा किया गया था कि ये कदम भारतीय समाज की पुनर्रचना में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। लेकिन वास्तव में ये तीनों कदम भारत की संघीय संरचना पर चोट करने वाले साबित हुए। इनसे आम नागरिकों के जीवन में संकट पैदा हुआ और छोटे कारोबारियों तथा उद्योगों को भारी नुकसान हुआ। भारत की विरासत की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी विरासत उदारवादी रही है। न्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की परंपरा हमारी विरासत का हिस्सा रही है। उन्होंने बुद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म में आलस्य और संग्रह की कोई जगह नहीं है। गीता भी कहती है कि जरूरत से ज्यादा संचय करने वाला व्यक्ति चोर के समान होता है।  आज समाज के भीतर परस्पर विश्वास समाप्त होता जा रहा है। सत्ता सवाल नहीं चाहती, जबकि गांधी व्यवस्था परिवर्तन की बात करते थे। आज जरूरत है कि हर नागरिक अपना दायित्व और कर्तव्य समझे तथा निडर और निर्भीक होकर सत्ता से सवाल करे।

विचार गोष्ठी में प्रोफेसर अमरेंद्र नारायण यादव, विकास नारायण उपाध्याय, प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह, अरविंद वरुण, प्रभात कुमार, वंदना शर्मा, सिस्टर फ्लोरीन, रमन कुमार , सुरेंद्र कुमार, अरविंद अंजुम आदि ने भी अपनी बात रखी । गोष्ठी की अध्यक्षता विजय कुमार जायसवाल ने किया । धन्यवाद ज्ञापन सोनू सरकार ने दिया । विचार गोष्ठी के बाद स्कूली बच्चों द्वारा एक नाटक प्रस्तुति भी की गई।

शाम 4 बजे ’ यात्रा खुदीराम बोस स्मारक चौक पहुंची । 30 अप्रैल 1908 को शहीद खुदीराम बोस ने इसी स्थान पर पहला बम विस्फोट करके अपनी स्वाधीनता संग्राम की नींव रखी थी । इसके बाद यात्री दल एवं बड़ी संख्या में स्थानीय युवा एवं महिलाएं पदयात्रा करते हुए मोती झील, शफी दाऊदी मार्केट पहुंची । यहां दौदी इंटरनेशनल स्कूल परिसर में यात्रियों का स्वागत किया गया । शफ़ी दाउदी ने मुज़फ़्फरपुर ज़िले में राष्ट्रवादी आंदोलन के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। असहयोग आंदोलन के दौरान जब महात्मा गांधी मुज़फ़्फरपुर आए थे, तब वे 7 दिसंबर 1920 को  शफ़ी दाउदी के घर, जिसे “शफ़ी मंज़िल” कहा जाता था, में ठहरे थे। यहां पर सर्व धर्म प्रार्थना भी आयोजित भी की गई।

इसके बाद यात्रा आगे बढ़ी और क्लब रोड में स्वतंत्रता सेना एवं वकील गया सिंह के घर पहुंची। गाय सिंह के परिवार ने यात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किय। चंपारण जाने के क्रम में.महात्मा गांधी मुज़फ्फरपुर मे गया सिंह के आवास पर भी ठहरे थे। यहां पर परिवार ने स्मारक के लिए अपनी जमीन भी दिया हैं , सरकार द्वारा निधि का भी आवंटन हुआ परंतु प्रशासनिक लापरवाही के कारण स्मारक के लिए कोई काम नहीं हुआ है। 

इसके पश्चात यात्रा अपने अंतिम पड़ाव जुब्बा साहनी पार्क पहुंची । जहाँ एक छोटी सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर कलाकार और स्थानीय आयोजक सुनील ने कई क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किए। 

आज यात्रा के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में सुरेंद्र कुमार , रंजीत कुमार , राम बाबू, संजीव साहू, शंभू मोहन प्रसाद , नीरज कुमार, सुरेश साहनी भी शामिल रहें।
आयोजन में सोनू सरकार , सुनील, , मकबूल अहमद, शहीद कमाल आदि की मुख्य भूमिका रही । 

यात्रा दल में शामिल साथी

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल, सचिव अरविंद अंजुम, उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज, सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरिन, यात्रा संयोजक अशोक भारत व प्रदीप प्रियदर्शी, बिहार प्रदेश लोक समिति के शिवजी सिंह, हिमालय विजेता कीर्ति, साइकिल गर्ल शिवानी कुमारी, कबड्डी खिलाड़ी तनु वर्मा, वैज्ञानिक चेतना निर्माण कार्यकर्ता विकास कुमार, युवा सामाजिक कार्यकर्ता उमेश तूरी, मयूर, सौरभ सिंह और पर्यावरण कार्यकर्ता अनूप कुमार।