जहां पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ – पटना से चंपारण यात्रा तीसरा दिन

‘बिहार के भूमिहीनों को जमीन का हक़ मिलना चाहिए’

‘महिलाओं की अहिंसक शक्ति को जागृत कर समाज का नवनिर्माण संभव है’ – यात्री दल

आजादी के आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा और उन्हें मजबूत करने के उद्देश्य से “जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ” पटना से चंपारण यात्रा निकाली गई है । आज तीसरे दिन यात्रा दल सुबह 6:30 बजे विराटनगर हाजीपुर से पदयात्रा करते हुए आगे बढ़ा।  गांधी चौक से गुजरते हुए यात्रा गांधी आश्रम पहुंची। नारायण सिंह द्वारा दान दी गई भूमि पर बने इस गांधी आश्रम की नींव रखने के लिए महात्मा गांधी 7 दिसंबर 1920 को यहां आए थे। आश्रम पहुंचकर यात्री दल ने सर्वधर्म प्रार्थना की, जिसमें पार्क में मौजूद स्थानीय लोग और बच्चे भी शामिल हुए।

गोरौल चौक, वैशाली में यात्री दल का भव्य स्वागत मेरी पंचायती मेरी शक्ति संगठन और किशोरी शक्ति मंच के किशोरियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया। इसके बाद सभी पदयात्रा करते हुए सभा स्थल तक पहुंचे। दोनों संगठन इलाके में व्यापक रूप से फैली बाल विवाह की प्रथा के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं और बालिकाओं तथा महिलाओं की शिक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए भी प्रयासरत हैं।

सभा की शुरुआत में महाराष्ट्र के गोंदिया जिले से यात्रा में शामिल युवा साथी मयूर ने “जय जगत, जय जगत पुकारे जा” गीत प्रस्तुत किया।

यात्रा के आयोजक अशोक भारत ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य जनता के बीच जाकर उनके बुनियादी अधिकार, सुरक्षा और न्याय के सवाल उठाना है। राज्य में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा, विशेषकर छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस जांच की निष्पक्षता और न्याय मिलने में हो रही देरी पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। साथ ही बिहार जैसे पिछड़े राज्यों में भूमिहीनों को वर्षों से लंबित सरकारी पट्टा और आवासीय भूमि देने की मांग की, ताकि वे सरकारी सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

उन्होंने कहा कि विनोबा भावे के भूदान आंदोलन की अधूरी विरासत को पूरा करना आवश्यक है, क्योंकि सरकार द्वारा घोषित चार डिसमिल भूमि का पट्टा अब तक केवल कागजों तक ही सीमित है। महिलाओं को भी अपनी शक्ति पहचाननी होगी, क्योंकि समाज और लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति उनकी जागरूकता में निहित है। महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया और उन्हें संघर्ष का सक्रिय हिस्सा बनाया। उनका विश्वास था कि अहिंसा की शक्ति महिलाओं में अधिक होती है, जिसका उदाहरण कस्तूरबा गांधी के धैर्य, सेवा और त्याग में देखा जा सकता है।

सभा के अंत में सभी ने विश्व में बढ़ते युद्ध के विरोध में नारे लगाए और गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। गोरौल में कार्यक्रम के आयोजन में खुशी कुमारी, रीमा कुमारी, रूबी कुमारी, आरती, अदिति, नेहा, हाजरा कौसर, शहजादी खातून, सलोनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 

इसके बाद तुर्की, वैशाली में एकता परिषद् उत्तर बिहार के साथियों द्वारा यात्रियों का जोरदार स्वागत किया गया। सभी पदयात्रा करते हुए एम.जी. मैदान, सकरी सरैया नहर चौक पहुंचे, जहां सैकड़ों की संख्या में उपस्थित ग्रामीण महिलाओं ने यात्रियों का स्वागत किया। यात्रियों का सूत की मालाओं से अभिनंदन किया गया। शुरुआत में अधिकारों से जुड़े कई क्रांतिकारी गीत भी गाए गए।

सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने कहा कि पटना से शुरू होकर चंपारण के भीतिहरवा आश्रम तक पहुंचने वाली यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में नव निर्माण और जागृति का प्रयास है। उन्होंने बताया कि यह यात्रा महात्मा गांधी की चंपारण सत्याग्रह की स्मृति को जीवित करती है, जब किसानों पर हो रहे अत्याचार और अन्यायपूर्ण करों के खिलाफ संघर्ष शुरू हुआ था। आज भी समाज में शांति, न्याय और समानता की आवश्यकता उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि युद्ध और हिंसा से सबसे अधिक नुकसान आम लोगों और सैनिक परिवारों को उठाना पड़ता है, जबकि कुछ लोग हथियारों के व्यापार से लाभ कमाते हैं। उन्होंने भूमि अधिकार के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज ऐसी स्थिति बन गई है कि खेती योग्य भूमि बनाने वाले ही भूमिहीन होते जा रहे हैं और गरीबों को भूमि का मालिकाना हक नहीं मिलने के कारण वे सरकारी योजनाओं और आवास सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। अडानी को भागलपुर में 1000 एकड़ जमीन मात्र 1 रुपये के सालाना किराए पर देने का उदाहरण दिया गया है । इसलिए यात्रा की मुख्य मांग है कि जिन्हें जमीन का पर्चा मिला है उन्हें वास्तविक कब्जा मिले और जिनके पास कब्जा है उन्हें कानूनी अधिकार दिया जाए। अन्याय के खिलाफ लड़ाई अस्वीकार, असहयोग, प्रतिकार और सत्याग्रह के रास्ते पर चलकर ही सफल हो सकती है, और समाज में प्रेम, बंधुत्व तथा जागरूकता के माध्यम से ही एक बेहतर देश और दुनिया का निर्माण संभव है।

इसके अलावा सभा को सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल, संयुक्त किसान मोर्चा की केंद्रीय समिति के सदस्य चौधरी राजेंद्र और एकता परिषद् के प्रदीप प्रियदर्शी ने भी संबोधित किया। 

उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज ने कहा कि जो लोग अपनी जमीन और अधिकार की बात करते हैं, उन्हें जेल में डाल दिया जाता है और उन पर लाठियां चलाई जाती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जो जमीन को जोतता है, वही उसका वास्तविक मालिक है। एकता परिषद के संस्थापक पी. वी. राजगोपाल ने भी जमीन और अधिकार के लिए बड़ी लड़ाई लड़ी। उनकी पदयात्रा में लगभग पचास हजार लोग शामिल हुए थे। बोधगया में संघर्ष वाहिनी के आंदोलन के माध्यम से महिलाओं को जमीन का अधिकार मिला। आज आवश्यकता है कि सभी भूमिहीन एकजुट होकर अपने अधिकार, न्याय और सम्मान के लिए आगे बढ़ें।

एकता परिषद से मलीखंदर प्रसाद, शिवनाथ पासवान, मंगल कुमार, रामशीला देवी, विशेश्वर गुप्ता, रामबाबू सहनी, नवल किशोर ने सभा के आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई । 

इसके बाद यात्रा आगे बढ़ते हुए मुजफ्फरपुर जिले में पहुंची। अंबेडकर भवन, मुसहरी प्रखंड में आज यात्रा का अंतिम पड़ाव था, जहां यात्री दल का स्वागत किया गया। इसके बाद शाम 6 बजे सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया।

आज यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर सभी प्रमुख स्थानीय आयोजकों को सर्वोदय जगत पत्रिका का यात्रा विशेषांक, ‘गांधी दर्शन के तात्विक आधार’ पुस्तक , सर्वोदय डायरी , कस्तूरबा कैलेंडर स्मृति-स्वरूप भेंट की गई।

13 अप्रैल को मुजफ्फरपुर में यात्रा दल के स्वागत में स्थानीय आयोजकों द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

यात्रा दल में शामिल साथी : सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल, प्रबंधक न्यासी शेख हुसैन, सचिव अरविंद अंजुम, उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता चौधरी राजेंद्र, सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरिन, यात्रा संयोजक अशोक भारत व प्रदीप प्रियदर्शी, बिहार प्रदेश लोक समिति के शिवजी सिंह, हिमालय विजेता कीर्ति, साइकिल गर्ल शिवानी कुमारी, कबड्डी खिलाड़ी तनु वर्मा, वैज्ञानिक चेतना निर्माण कार्यकर्ता विकास कुमार, युवा सामाजिक कार्यकर्ता उमेश तूरी, मयूर, सौरभ सिंह और पर्यावरण कार्यकर्ता अनूप कुमार।

अशोक भारत
प्रदीप प्रियदर्शी