25 नवम्बर 2025
राजघाट, दिल्ली
राजघाट, बनारस से निकली ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा 55वें दिन दिल्ली राजघाट पहुँची
संविधान, लोकतंत्र, विरासत और सद्भावना का संदेश लेकर 2 अक्टूबर 2025 को राजघाट, वाराणसी से प्रारम्भ हुई ऐतिहासिक ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा आज अपने 55वें दिन फरीदाबाद सेक्टर–37 गुरुद्वारा से आगे बढ़ते हुए बदरपुर बॉर्डर पार कर दिल्ली में प्रवेश कर गई। पदयात्रा के अंतिम पड़ाव में देश के 20 से अधिक राज्यों से आए बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
ओखला मोड़ पर खुदाई खिदमतगार की टीम ने फ़ैसल ख़ान के नेतृत्व में पदयात्रियों का हार्दिक स्वागत किया तथा जलपान की व्यवस्था की। इस अवसर पर पदयात्रियों ने खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान के अदम्य सेवा–भाव और मानवता, प्रेम तथा अहिंसा की उनकी अडिग परंपरा को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
ओखला मोड़ से आगे बढ़ते हुए पदयात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह पहुँची, जहाँ अमीर ख़ुसरो की दरगाह पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


यात्रा आगे बढ़कर निजामुद्दीन स्थित मानव मंदिर परिसर पहुंची जहां एक विशेष स्वागत–कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी व्यवस्था अरुण योगी जी के नेतृत्व में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में सुभाष चंद्र तिवारी (ट्रस्टी, मानव मंदिर), राष्ट्रीय गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष रामचंद्र राही सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता तथा गांधी–विचार से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मानव मंदिर के महाराज जी ने कहा कि धर्म को सम्प्रदाय का ग़ुलाम नहीं होने देंगे और रोशनी को अंधेरे के हाथों में नीलाम नहीं होने देंगे। गांधी और विनोबा जी का मानव-मंदिर में सार्थक मिलन हो रहा है। जैन धर्म में तपस्या की परंपरा बहुत गहरी और महान है।‘गांधी ग्राम’ सहित आचार्य विनोबा भावे की रचनाओं और उनके 50,000 किमी लंबे ऐतिहासिक पदयात्रा–जीवन को स्मरण करते हुए उनके देहदान–संकल्प तथा विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाली परंपरा को विशेष रूप से रेखांकित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘रघुपति राघव राजाराम’ के सामूहिक गायन से हुई। इसमें गांधी, विनोबा और अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान की साझा मानवीय विरासत-सत्य, अहिंसा और सेवा को समकालीन समय में आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।
कुमार प्रशांत ने संकहा कि “मानव मंदिर बाहर नहीं, सबसे पहले हमारे भीतर निर्मित होता है। समझ तब बढ़ती है जब हम अपने विचारों और कदमों को एक दिशा में जोड़ते हैं- भीतर और बाहर, दोनों स्तरों पर।”
पदयात्रा शमा को गांधी स्मारक निधि, राजघाट पहुँची, जहाँ पदयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस अवसर पर पदयात्रियों द्वारा सामूहिक गायन और नृत्य भी प्रस्तुत किया गया।
स्थानीय आयोजक: फ़ैसल ख़ान, डॉ. संत प्रकाश, अशोक शरण आदि।

यात्रा में शामिल प्रमुख प्रतिभागी
चंदन पाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्व सेवा संघ), रामधीरज, नन्दलाल मास्टर (उ.प्र.), अरविंद अंजुम (झारखंड), भूपेश भूषण (म.प्र.), सोमनाथ रोड़े (महाराष्ट्र), संजय सिंह (सचिव, गांधी स्मारक निधि), सतीश मराठा (हरियाणा), जागृति राही, आसमा आदिवासी (म.प्र.), संजय राय (सचिव, हरिजन सेवक संघ), दशरथ भाई (किसान नेता), प्रो. मैदानी, अशोक भरत, जितेंद्र नंदी, अशोक भाई, जोखन यादव, विद्याधर मास्टर, श्यामधर तिवारी, प्रवीण वर्मा, विवेक मिश्रा, नीरज राय, प्रियेश, दिवाकर, धनंजय, नीति, पुरुषोत्तम विश्वनाथ, तरुण कुमार, प्रियंका, सुनील मास्टर, आशा राय, अनीता पटेल, सीमा बेबी, आशा रानी, मैनब (उ.प्र.), जगदीश कुमार (राजस्थान), विकास, मानिकचंद साहनी, डॉ. विष्णु कुमार (बिहार), सरिता बहन, सिस्टर फ्लोरीन, अलीभा, अंतर्यामी बराल, सौरभ, निधि, बृजेश, टैन, सचिन, आंचल, संध्या, श्रीनिवासन, विष्णु कुमार, संजना, विवेक यादव, नीलम, विपिन, रमाकांत, रेवा, अनु, बजरंग भाई, ऋषभ, शिवधर, डॉ. एम. एच. पाटील, बीरेंद्र आदि।
लगभग 100 से अधिक पदयात्री लगातार यात्रा में सहभागी बने हुए हैं।

