बुल्ले शाह के गीत से गूंजा पदयात्रा मार्ग, प्रेम और मानवता का संदेश
5 अक्टूबर, खान्यान: गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा का पांचवां दिन त्रिवेणी से मोगरा रोड होते हुए खान्यान में समाप्त हुआ। प्रेम, शांति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर चल रही इस पदयात्रा में देश के करीब 15 राज्यों के पदयात्री शामिल हैं और यात्रा 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन पहुँचेगी।
दिन की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना से हुई। यात्रा शुरू होने से पहले स्थानीय आयोजकों का धन्यवाद करते हुए उन्हें सर्वोदय डायरी 2027 और महात्मा गांधी की आत्मकथा भेंट की गई। ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरते हुए पदयात्रियों ने स्थानीय लोगों के बीच यात्रा के उद्देश्य से संबंधित पर्चे वितरित किए और संवाद किया।
पहले पड़ाव में यात्रा रुकी। सभी पदयात्रियों को सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल द्वारा सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान द्वारा निर्मित, खादी आयोग से अनुमोदित न होने वाले असली खादी के गमछे देकर सम्मानित किया गया, जो उन्हें उमस भरी गर्मी से बचाने में काम आएँगे।




तेज धूप के बीच पंजाब के प्रसिद्ध सूफी संत बुल्ले शाह के गीत ‘बुल्ला की जाना मैं कौन’ गीत पर पदयात्री झूम उठे और पदयात्रा में नई ऊर्जा भर दी। बुल्ले शाह पंजाब के मशहूर सूफी फकीर थे । बुल्ले शाह की परंपरा कबीर, लालन फकीर और गुरु नानक की तरह सामाजिक पाखंड, भेदभाव और संकीर्ण पहचान से ऊपर उठकर इंसानियत का संदेश देती है। गीत का मूल संदेश भी यही है कि मनुष्य की असली पहचान जाति, धर्म, नाम और सामाजिक पहचान से परे उसकी मानवता में है।
दोपहर में यात्रा अपने अंतिम पड़ाव खान्यान पहुँची, जहाँ यात्रियों का स्वागत किया गया तथा भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई। खान्यान चौक में शाम को पदयात्री दल द्वारा एक नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया।
प्रेम और ‘नेबरक्रेसी’ से ही नफरत और हिंसा का मुकाबला – चंदन पाल
खान्यान चौक में शाम को पदयात्री दल द्वारा एक नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि आज हिंसा, नफरत, द्वेष और युद्ध का माहौल भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में प्रेम, शांति, सद्भाव और बंधुत्व को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा तथा रवींद्रनाथ ठाकुर की मानवता, शांति और भाईचारे की विचारधारा को आगे बढ़ाने का प्रयास है। यात्रा में पश्चिम बंगाल के साथ तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों के लोग शामिल हैं।




उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल विभाजन के दौरान रवींद्रनाथ ठाकुर ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए राखी बंधन उत्सव आयोजित किया था और इसी ऐतिहासिक स्मृति में यात्रा का समापन 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन में होगा। चंदन पाल ने लोगों से ‘नेबरक्रेसी’ यानी पड़ोसीपन, आपसी सहयोग और भाईचारे को मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि समाज में प्रेम और सद्भाव मजबूत होगा तो दंगे, संघर्ष और नफरत के लिए जगह नहीं बचेगी। उन्होंने बिहार के हजरत शाह का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ आज भी ईद पर हिंदू परिवार मुस्लिम परिवारों के घर दूध और मिठाइयाँ लेकर जाते हैं और हिंदू त्योहारों पर मुस्लिम परिवार हिंदू घरों में मिठाइयाँ पहुँचाते हैं।
गांधी के सत्य-अहिंसा के मार्ग को फिर अपनाने की जरूरत: सुनील कुमार
सभा में पंजाब से जुड़े पदयात्री सुनील कुमार ने कहा कि आज जब समाज को जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पर बाँटने की कोशिश हो रही है, तब गांधी के सत्य, अहिंसा और एकता के मार्ग को फिर अपनाने की जरूरत है। उन्होंने एक राष्ट्र, एक मानवता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। भगत सिंह की शहादत को याद करते हुए उन्होंने ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ गीत प्रस्तुत किया और ‘हम होंगे कामयाब’ के माध्यम से एकता, विश्वास और शांति का संदेश दिया। सभा के अंत में मध्य प्रदेश के शहडोल से आए इस्तियाक भाई ने ‘मंदिर-मस्जिद मत बाँटो इंसान को’ और ‘जागो ए नौजवान’ गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन ‘जय जगत’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों के साथ हुआ।





बीरुल, रहमान, शेख अनवर हुसैन, अल्ताफ अली, मोहम्मद ओमिल उस्मान, सद्दीन इस्लाम, एस.के. शेख सफ्फुरुद्दीन, रजन दास, गौरचंद्र, अनिफ सरकार, शेख कादिर अली, मोहम्मद रफी, वापी तथा जय किसान हुगली के अध्यक्ष सुशांत कांडी सहित अन्य लोगों द्वारा आज दोपहर और रात के भोजन की व्यवस्था की गई।
इस दिन की यात्रा में जोयदेब दास, अजय दत्ता, निधि, अलीभा, सिस्टर फ्लोरिना, मोहित, देबाशीष, बिस्वजीत गोराई, विष्णु, अनूप कुमार, आयशा, आसमा आदिवासी, रीपांजल लकड़ा, कुंती बोइपाई, निधि मुंडा, किरण, सिद्धार्थ, चंदन पाल, बिरेन डेका, सतीश मराठा, बिपिन बारी, जितेन नंदी, श्रीनिवासन, विक्रम पाटिल, उमेश टुरी, बिप्लब नायक, अरविंद अंजुम, इस्ताक, सुशांत मोहंती, किरण वीर, सतरंजन पाल, रॉबिन जाना, तरुण जाना, शांतू सरदार, जगदीश कुमार और विकास कुमार सहित अन्य पदयात्री शामिल रहे।





