‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’
5 अक्टूबर, त्रिवेणी। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा अपने चौथे दिन चुंचुड़ा से आगे बढ़ते हुए त्रिवेणी पहुंची।
प्रेम, शांति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर निकली यह पदयात्रा 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन पहुंचेगी। चौथे दिन देश के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 17 राज्यों के पदयात्रियों ने इसमें हिस्सा लिया।
आज चौथे दिन की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना से हुई। सुबह 9 बजे यात्रा की शुरुआत से पहले स्थानीय आयोजकों का धन्यवाद करते हुए उन्हें सर्वोदय डायरी 2027 और गांधी की आत्मकथा भेंट स्वरूप दी गई।


इसके बाद यात्रा नारों और गीतों के साथ आगे बढ़ी। यात्रा बैंडेल बेसिलिका चर्च के पास से गुजरी। यह भारत के सबसे पुराने जीवित चर्चों में से एक है, जिसकी स्थापना पुर्तगालियों ने 1599 में की थी।
“प्रेम ही गांधीवादी विचार और राजनीति की मूल शक्ति है।”-संजय गांगुली
इसके बाद यात्रा बैंडेल स्थित प्रतिबंधी कल्याण केंद्र- Centre for Children with Disabilities- पहुंची, जहां यात्रियों का स्वागत किया गया।
स्वागत सभा के दौरान यात्रा के संयोजकों में से एक एवं सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने यात्रा दल के सभी सदस्यों का स्वागत किया।
पदयात्रियों का स्वागत करते हुए प्रतिबंधी कल्याण केंद्र से जुड़े सुब्रत बनर्जी ने कहा कि बैंडेल धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का उदाहरण है, जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय लंबे समय से साथ रहते आए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच साथ रहने में कोई कठिनाई नहीं है, बल्कि विभाजन और तनाव की स्थितियां अक्सर बाहर से पैदा की जाती हैं।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ काम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रेम, संवेदना और समर्पण के साथ काम करना ही सामाजिक बदलाव का रास्ता है। दुनिया में बढ़ती हिंसा और नफरत के बीच शांति पदयात्रा को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में दूसरों के विचारों को सुनना और उनका सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शांति और अहिंसा की पहली शिक्षिका मां होती है।


जन संस्कृति मंच के संयोजक एवं जाने-माने रंगकर्मी संजय गांगुली ने कहा कि गांधीजी ने कभी अपनी सोच दूसरों पर नहीं थोपी और न ही अंध-अनुकरण की बात की। उनके विचार सवाल करने, विचार करने, प्रेम और सहिष्णुता की भारतीय परंपरा पर आधारित थे।
उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काम करते और यात्रा करते हुए उन्होंने देखा है कि आज हर जगह लोग शांति की तलाश में हैं और अहिंसा केवल व्यक्तिगत मूल्य नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर स्वीकार किया गया एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मार्ग बन चुकी है।
स्वामी विवेकानंद के ‘प्रेम’ के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रेम ही गांधीवादी विचार और राजनीति की मूल शक्ति है। उन्होंने कहा कि गांधी के विचारों को समझने के लिए उनकी राजनीति को केवल अनुयायी बनाने की दृष्टि से नहीं, बल्कि स्वतंत्र सोच, प्रश्न और मानवीय संवेदना के आधार पर देखना जरूरी है।



इसके बाद यात्रा आगे बढ़ते हुए दोपहर के पड़ाव बासबेरिया पहुंची, जहां बासबेरिया संतान संघ, त्रिवेणी, हुगली द्वारा यात्रा दल का स्वागत किया गया। यहां भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई थी।
दोपहर के विश्राम के बाद यात्रा अपने अंतिम पड़ाव त्रिवेणी पंचानतला की ओर आगे बढ़ी। रास्ते में 1890 में स्थापित बासबेरिया पुस्तकालय और 1919 में स्थापित त्रिवेणी हितसाधिनी पुस्तकालय देखने का अवसर मिला।
“‘जय जगत’ से बड़ा कोई संदेश नहीं हो सकता।” -जितेन नंदी
अपने अंतिम पड़ाव पर त्रिवेणी नागरिक समाज ने यात्रा दल का गर्मजोशी से स्वागत किया। शाम को स्थानीय लोगों का एक समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक गीतों की प्रस्तुति से हुई। इसमें रवींद्रनाथ टैगोर और बंगाल के मशहूर कवि काजी नजरुल इस्लाम की रचनाओं पर आधारित गीत प्रस्तुत किए गए।
त्रिवेणी-बांसबेरिया का इतिहास स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक बदलाव की समृद्ध विरासत से जुड़ा है।”- जोयदेब दास
त्रिवेणी के स्थानीय आयोजक सुभाष ने कहा कि कठिन समय में गांधीजी की अहिंसा और मौन के साहस से प्रेरणा लेते हुए यह यात्रा हैदरी मंजिल से शांतिनिकेतन की ओर बढ़ रही है। रवींद्रनाथ टैगोर के राखी बंधन आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी समाज को जोड़ने और भाईचारा मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हमें उन लोगों के साथ खड़ा होना है, जिन्होंने अपना बहुत कुछ खोया है और भोजन व रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। घर उजाड़ने वालों के साथ खड़े होने के बजाय हमें टूटे घरों और जीवन को फिर से बसाने वालों की मदद के लिए हाथ बढ़ाना चाहिए।
त्रिवेणी के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए जोयदेब दास ने बताया कि पुराने समय में यहां से बड़ी मात्रा में गंगा का जल प्रवाहित होता था और दामोदर नदी का पानी भी इसमें मिलता था। इन जलमार्गों के कारण यहां बंदरगाह विकसित हुआ और ऐतिहासिक नगर सप्तग्राम का उदय हुआ, जिसने बंगाल के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने यंग बंगाल आंदोलन और इसके प्रमुख नेता रामगोपाल घोष का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जन्म इसी क्षेत्र के पास हुआ था। जमींदारी से उद्योग की ओर उनका बढ़ना उस दौर में पूंजी के बदलते स्वरूप का उदाहरण था।


उन्होंने बताया कि त्रिवेणी-बांसबेरिया क्षेत्र का स्वतंत्रता आंदोलन में भी योगदान रहा। कई स्वतंत्रता सेनानियों ने यहां भूमिगत रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाया। बैंकश मजूमदार, वृंदावन चटर्जी, विभूति दत्त और ‘बांसबेरिया के गांधी’ कहे जाने वाले सुधीर मुखर्जी का इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस स्थानीय इतिहास को सुभाष बनर्जी ने करीब 70 लोगों से बातचीत कर मौखिक इतिहास के रूप में संकलित किया है।
पदयात्री जितेन नंदी ने कहा कि विनोबा भावे ने 1954-55 में अपनी पदयात्रा के दौरान ‘जय जगत’ का नारा दिया था। उन्होंने कहा कि आज भी इन दो शब्दों से बड़ा कोई संदेश नहीं हो सकता। लोगों को देशभक्त और देशद्रोही जैसे खांचों में बांटने के बजाय हमें दुनिया को एक इकाई के रूप में देखने की जरूरत है।
रवींद्रनाथ टैगोर ने बहुत पहले विश्वभारती के माध्यम से भारत और विश्व को जोड़ने का विचार सामने रखा था। हिमालय, नदियां और समुद्र किसी एक देश की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया से जुड़े हैं। इसलिए आज ‘जय जगत’ का विचार और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हमें संकीर्ण राष्ट्रवाद से आगे बढ़कर पूरी पृथ्वी को अपना घर मानने वाली सोच विकसित करनी होगी।
राजस्थान से आए साथी जगदीश ने भी मौजूदा दौर में गांधी विचारों की प्रासंगिकता और इसके प्रसार की जरूरत पर जोर दिया।
आज की पदयात्रा में शेख हुसैन, निधि, अलीभा, सिस्टर फ्लोरिना, मोहित, देबाशीष, बिस्वजीत गोराई, विष्णु, अनूप कुमार, आयशा, आसमा आदिवासी, रीपांजल लकड़ा, कुंती बोइपाई, निधि मुंडा, किरण, सिद्धार्थ, शिव, सोमित आचार्य,चंदन पाल, बिरेन डेका, सतीश मराठा, बिपिन बारी, जितेन नंदी, श्रीनिवासन, एम.एच. पाटिल, विक्रम पाटिल, उमेश टुरी, बिप्लब नायक, अरविंद अंजुम इस्ताक, रामाकांत, आयुष, सुशांत मोहंती, किरण वीर, आयशा खातून, सतरंजन पाल, रॉबिन जाना, तरुण जाना, शांतू सरदार, सुशांत मोहंती, जगदीश कुमार और विकास कुमार सहित अन्य पदयात्री शामिल रहे।

