15 अप्रैल 1917 को मोतिहारी, पूर्वी चंपारण के जिस रेलवे स्टेशन पर गांधीजी उतरे थे, उस ऐतिहासिक जगह पर यात्री दल ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
प्रेस विज्ञप्ति – 15 अप्रैल 2026
मोतिहारी, पूर्वी चंपारण
जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ
पटना से चंपारण यात्रा
10 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026
आजादी के आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा तथा उन्हें मजबूत करने के उद्देश्य से “जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ” पटना से चंपारण यात्रा निकाली गई है। आज छठे दिन गांधी प्रजापति सेवा सदन पुस्तकालय संग्रहालय, बोकाने कला में सुबह 6:30 बजे सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन हुआ।
प्रार्थना के बाद सुबह 7 बजे गांव में प्रभात फेरी निकाली गई। ग्रामीणों में इस यात्रा को लेकर काफी उत्सुकता दिखी। लोगों के बीच पर्चे भी वितरित किए गए। इस दौरान चौक पर एक छोटी सभा का भी आयोजन किया गया।



इस अवसर पर सर्व सेवा संघ के मंत्री एवं यात्रा दल के सदस्य अरविंद अंजुम ने कहा कि यह यात्रा इंसानियत के लिए है। दुनिया में फैलती नफरत और हिंसा को केवल प्यार, समझ और मोहब्बत से ही दूर किया जा सकता है। युद्ध अन्याय का सबसे संगठित और विकृत रूप है और यह स्वयं में एक समस्या है, समाधान नहीं।
प्रभात फेरी से लौटने के बाद गांधी प्रजापति सेवा सदन पुस्तकालय संग्रहालय के संस्थापक, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाप्रेमी श्री नारायण मुनि जी एवं उनके सहकर्मियों ने यात्री दल का माला पहनाकर स्वागत किया।
श्री नारायण मुनि इस क्षेत्र में “चंपारण के गांधी” के तौर पर भी जाने जाते हैं। 12 वर्ष की उम्र में जब उन्हें सूचना मिली कि गांधीजी पटना आए हैं, तो वे चंपारण से पटना उन्हें देखने गए। तब से वे गांधी विचार से प्रेरित होकर समाज को अपनी निस्वार्थ सेवा दे रहे हैं। उन्होंने इस संस्था की स्थापना ग्रामीण समाज में शिक्षा, जागरूकता और गांधीवादी विचारों के प्रसार के उद्देश्य से की थी। आज इस पुस्तकालय में महात्मा गांधी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित पुस्तकें, लेख तथा कई महत्वपूर्ण ग्रंथ सुरक्षित रखे गए हैं।
आज 98 वर्ष की उम्र में भी, पक्षाघात (Paralysis) से पीड़ित होने के बावजूद, वे प्रतिदिन पुस्तकालय आते हैं।



पुस्तकालय परिसर में स्थित गांधी प्रतिमा पर यात्रियों ने माल्यार्पण किया।
इसके बाद यात्री दल ऐतिहासिक उत्क्रमित उच्चतर गांधी विद्यालय, बड़हरवा लखनसेन पहुंचा। गांधी समिति से जुड़े ओम प्रकाश पांडे ने इस विद्यालय के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताया कि 13 नवंबर 1917 को महात्मा गांधी ने ग्रामीण शिक्षा और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यहां एक बुनियादी विद्यालय (Basic School) की स्थापना कराई थी। यह चंपारण में गांधीजी द्वारा शुरू किया गया पहला शिक्षा केंद्र माना जाता है। यूरोप से प्रशिक्षित बबन गोखले एवं उनकी पत्नी अवंतिकाबाई को यहां का प्रभारी बनाया गया था। स्थानीय किसान बख्शी शिव गुलाम लाल ने स्कूल के लिए लगभग 4.5 एकड़ जमीन दान में दी और आजादी मिलने तक स्कूल के खर्च की व्यवस्था भी की। यहां बच्चों को केवल किताबी पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्वच्छता, खेती-किसानी, बुनाई, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता जैसे व्यावहारिक विषयों की भी शिक्षा दी जाती थी। समय के साथ यह प्रारंभिक विद्यालय सरकारी व्यवस्था में शामिल होकर उत्क्रमित विद्यालय और उच्च विद्यालय के रूप में विकसित हो गया।
ओम प्रकाश पांडे ने आगे बताया कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण विद्यालय के नाम से “बुनियादी” शब्द हटा दिया गया है। यात्रा दल ने मांग की है कि इस ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखने के लिए विद्यालय के नाम में फिर से “बुनियादी” शब्द जोड़ा जाए। इसके अलावा पूरे बिहार में जहां-जहां भी बुनियादी विद्यालय हैं, वहां के लिए एक अलग पाठ्यक्रम तैयार किया जाए, जो गांधीजी की नई तालीम की भावना के अनुरूप हो। इस पाठ्यक्रम में पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल को भी शामिल किया जाए, ताकि शिक्षा बच्चों के जीवन और समाज दोनों के लिए उपयोगी बन सके।


यात्रा दल की ओर से आयोजक अशोक भारत और सिस्टर फ्लोरीन ने गांधीजी के विचारों और मूल्यों को लेकर बच्चों से संवाद किया और सत्य तथा अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। स्कूल परिसर में स्थित गांधी प्रतिमा पर यात्रियों ने माल्यार्पण किया। इस दौरान मुखिया श्यामाकांत सिंह, हेडमास्टर कमलेश्वर पासवान तथा शिव गुलाम लाल के पोते विकास चंद्र श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।
दोपहर में यात्रा दल बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन पहुंचा। इसी स्टेशन पर महात्मा गांधी पहली बार 15 अप्रैल 1917 को दोपहर 3 बजे आए थे। गांधी संग्रहालय और रेलवे प्रशासन द्वारा हर साल आज के दिन कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।यात्रा दल ने इसमें सहभागिता निभाते हुए ठीक 3 बजे प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर लगी गांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम में गांधी संग्रहालय के सचिव विनय सिंह, डॉ. चंदन कुमार, संजीव, चंद्रमा यादव, चंचल कुमार तथा रेलवे के कई अधिकारी, जिनमें स्टेशन मास्टर, स्वास्थ्य निरीक्षक और ट्रैफिक इंस्पेक्टर शामिल थे, उपस्थित रहे।


शाम में यात्रा दल मोतिहारी के अजगरी गांव में बठक मियाँ के परिवार से मिलने पहुंचा। बठक मियाँ चंपारण सत्याग्रह के एक गुमनाम वीर नायक थे, जिन्होंने 1917 में महात्मा गांधी की जान बचाई थी। ब्रिटिश नील बागान मालिक इरविन द्वारा गांधीजी को रात के भोजन में जहर मिलाकर मारने की साजिश रची गई थी। उनके रसोइए बठक मियाँ को साफ आदेश दिया गया था कि गांधीजी के दूध में जहर मिला दें। लेकिन उनका जमीर जाग गया और उन्होंने जानबूझकर दूध गिरा दिया तथा फिसलने का नाटक किया। इस तरह गांधीजी की जान बच गई। 1950 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा सार्वजनिक रूप से बठक मियाँ को सम्मानित किया गया था।




अजगरी गांव में लोगों ने बताया कि उनके परिवार का यहां कोई सदस्य अब नहीं रहता। उनके खानदान के लोग गांव छोड़कर नरकटियागंज के एक्वा परसौनी में बस गए हैं। यात्री दल ने बठक मियाँ की मजार को भी देखा, लेकिन यह रख-रखाव के अभाव में जर्जर स्थिति में है।
आज यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर सभी प्रमुख स्थानीय आयोजकों को सर्वोदय जगत पत्रिका का यात्रा विशेषांक, ‘गांधी दर्शन के तात्विक आधार’ पुस्तक, सर्वोदय डायरी और कस्तूरबा कैलेंडर स्मृति-स्वरूप भेंट किए गए।
यात्रा दल में शामिल साथी
सर्व सेवा संघ के सचिव अरविंद अंजुम, सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरिन, यात्रा संयोजक अशोक भारत, आरा से अशोक सिंह, तमिलनाडु से श्रीनिवासन, हिमालय विजेता कीर्ति, वैज्ञानिक चेतना निर्माण कार्यकर्ता विकास कुमार, युवा सामाजिक कार्यकर्ता उमेश तूरी, महाराष्ट्र से मयूर साकरे, पंजाब से सुनील कुमार शर्मा और पर्यावरण कार्यकर्ता अनूप कुमार।

