देश के सोए हुए लोगों को जगाने के लिए यह यात्रा – पदयात्रा का 53वां दिन

23 नवम्बर 2025
पृथला, पलवल, हरियाणा

“इस देश के सोए हुए लोगों को जगाने के लिए आप यह यात्रा कर रहे हैं।” – करण सिंह दलाल

2 अक्टूबर को राजघाट, बनारस से संविधान, लोकतंत्र, सद्भावना और बंधुत्व का संदेश लेकर आरम्भ हुई ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा अपने 53वें दिन आर्य समाज मंदिर औरंगाबाद से आगे बढ़कर चौराहे पर रुकी। यहां स्थानीय आयोजक फिरेज सिंह पोसवाल, जनरल सेक्रेटरी हरियाणा कांग्रेस, तथा औरंगाबाद के सरपंच राजू चौहान को गांधी की आत्मकथा सत्य के साथ मेरे प्रयोग और अन्य गांधी साहित्य भेंट किया गया। यात्रा गीतों और नारों के साथ आगे बढ़ी।

आगे चलकर यात्रा पलवल शहर पहुँची। शहर की संकरी गलियों से होते हुए पदयात्री श्री गांधी सेवा आश्रम ट्रस्ट पहुँचे, जहाँ एक सभा का आयोजन किया गया और यात्रियों का माला और सॉल पहनाकर स्वागत किया गया।

पूर्व मंत्री एवं विधायक हरियाणा करण सिंह दलाल ने कहा कि “जब देश का आम नागरिक घर से बाहर नहीं निकल रहा है, ऐसे समय में आप इस यात्रा के माध्यम से गांधी और स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं—यह बहुत बड़ा काम है। मैं आपका पलवल के गांधी आश्रम में स्वागत करता हूँ। आज के दौर में जब गांधी और अन्य अग्रिम पंक्ति के नेताओं के विचारों की असहमति को आपसी अनबन बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है, तब यह स्मारक याद दिलाता है कि हमारे नेता एक-दूसरे का कितना सम्मान करते थे। इस आश्रम की आधारशिला सुभाष चंद्र बोस ने रखी थी। आप देश के सोए हुए लोगों को जगाने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं। गांधी, सुभाष और भगत सिंह के सपनों को साकार करने के लिए हम लगातार आवाज उठाते रहेंगे और बेहतर समाज का निर्माण करेंगे।”

यशपाल मंगला ने आश्रम का इतिहास बताते हुए कहा कि “10 अप्रैल 1919 को जब गांधी जी मथुरा से अमृतसर जा रहे थे, तब उन्हें पलवल में गिरफ्तार किया गया और एक दिन के लिए पलवल जेल में रखा गया था। पदयात्रा उस जेल के बाहर भी रुकी थी। वर्ष 1938 में सुभाष चंद्र बोस यहाँ आए और इस इमारत की नींव रखी। हमारे शहर में पाँच स्वतंत्रता सेनानी रहे, जिनमें से तीन गांधी जी के समर्थक थे। पलवल हमेशा देश की आवाज बुलंद करने में अग्रणी रहा है। हम देश में गांधी का वह समाज चाहते हैं जिसमें अंतिम व्यक्ति की चिंता की जाती है।”

पदयात्रा के संयोजक राम धीरज ने कहा कि “हमें खुशी है कि गांधी जी कभी इस शहर में आए थे और आज हमारी यात्रा भी उसी मार्ग से गुजर रही है। यह भी सुखद है कि आज बहुत कम ऐसे आश्रम मिलते हैं जिनका रखरखाव इतना स्वच्छ और सुव्यवस्थित हो। हमारी यात्रा पाँच प्रमुख उद्देश्यों के साथ चल रही है—स्वतंत्रता की विरासत की रक्षा, लोकतंत्र की सुरक्षा, संविधान की रक्षा, संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे दबाव के विरुद्ध आवाज, तथा कौमी एकता और सद्भावना को मजबूत करना।”

यात्रा के साथी विवेक ने कहा कि “आज देश की सरकार लगातार लोगों को नफरत की ओर धकेल रही है, धार्मिक हिंसा और धर्मांधता बढ़ रही है। हम इन सबके खिलाफ आवाज उठाएँगे। हम देश के युवाओं से अपील करते हैं कि वे हमारी यात्रा से जुड़ें—अब दिल्ली दूर नहीं।” सभा का संचालन महेंद्र सिंह चौहान ने किया। सभा में आशीष मंगला, विनोद बंसल, यशपाल मंगला, जयहिंद बंसल, राजेश गर्ग सहित संस्था के कई पदाधिकारी उपस्थित थे।

यात्रा में शामिल प्रमुख प्रतिभागी:

चंदन पाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्व सेवा संघ), रामधीरज, नन्दलाल मास्टर (उ.प्र.), अरविंद अंजुम (झारखंड), भूपेश भूषण (म.प्र.), सोमनाथ रोड़े (महाराष्ट्र), संजय सिंह (सचिव, गांधी स्मारक निधि), सतीश मराठा (हरियाणा), आसमा आदिवासी (म.प्र.), संजय राय (सचिव, हरिजन सेवक संघ), दशरथ भाई (किसान नेता), प्रो. मैदानी, अशोक भाई, जोखन यादव, विद्याधर मास्टर, श्यामधर तिवारी, प्रवीण वर्मा, विवेक मिश्रा, नीरज राय, प्रियेश, सुनील मास्टर, आशा राय, अनीता पटेल, सीमा बेबी, आशा रानी, मैनब (उ.प्र.), जगदीश कुमार (राजस्थान), विकास, मानिकचंद साहनी, डॉ. विष्णु कुमार (बिहार), सरिता बहन, सिस्टर फ्लोरीन, अलीभा, अंतर्यामी बराल, सौरभ, निधि, बृजेश, टैन, सचिन, आंचल, संध्या, श्रीनिवासन, विष्णु कुमार, आसमा आदिवासी, संजना, विवेक यादव, नीलम, मैनब, सुनील मास्टर, विपिन, रमाकांत, रेवा, अनु, बजरंग भाई, ऋषभ, शिवधर, डॉ. एम. एच. पाटील, बीरेंद्र आदि।
लगभग 80 से अधिक पदयात्री निरंतर यात्रा में सम्मिलित हैं।