11 नवम्बर, 2025
आगरा
हमें विश्वगुरु नहीं, विश्व मित्र बनना है – अरविंद अंजुम
देश में बदलाव सिर्फ युवा वर्ग ही ला सकता है – सोमनाथ रोड़े
पदयात्रा का 41वाँ दिन रात्रि पड़ाव गांधी स्मारक से शुरू हुआ। गांधी स्मारक में स्थानीय आयोजकों द्वारा पदयात्रियों का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया। पदयात्रा टीम की ओर से स्वागतकर्ताओं को सर्वोदय जगत पत्रिका, गांधीजी की आत्मकथा सत्य के प्रयोग, तथा संघ द्वारा प्रकाशित नई पुस्तक आरोपों की आंधी में अडिग गांधी भेंट की गई। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन, चंद्रमोहन प्रसार ,जगदीश यादव आदि उपस्थित रहे।
इसके बाद यात्रा गांधी स्मारक से आगे बढ़ी और अगला पड़ाव डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय रहा, जहाँ पदयात्रियों ने डॉ. अम्बेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया।




पदयात्रा इसके बाद आगरा शहर के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान आगरा कॉलेज पहुँची, जहाँ ‘हमारे समय की चुनौतियाँ’ विषय पर एक सभा आयोजित की गई। आगरा कॉलेज एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है, जिसकी स्थापना आज़ादी से पहले ब्रिटिश शासन काल में हुई थी। यह कार्यक्रम गंगाधर शास्त्री सभागार में आयोजित हुआ। यही वह सभागार है, जहाँ महात्मा गांधी और गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे महान विभूतियाँ शिक्षकों और विद्यार्थियों से संवाद कर चुकी हैं। कॉलेज के शिक्षकों ने पदयात्रियों का सफा पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य सी. के. गौतम ने की। उन्होंने कहा कि बनारस से दिल्ली तक की यह पदयात्रा बहुत बड़ा कार्य है, और आज के समय में इतने दिनों तक यात्रा के लिए समय निकालना वास्तव में प्रेरणादायक है।
सभा में सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने यात्रा के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह यात्रा 2 अक्टूबर से 26 नवंबर तक चलेगी। यह राजघाट, वाराणसी से दिल्ली तक लगभग 1000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। कुल 110 पड़ाव होंगे और यात्रा 56 दिनों में पूरी होगी। उन्होंने कहा कि हम अपनी विरासत, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिस विचारधारा से हम लड़ रहे हैं, वह वर्चस्व और ‘विश्वगुरु’ बनने की सोच है, जबकि हम सभी को समान मानते हैं और ‘विश्व मित्र’ बनने की विचारधारा रखते हैं। विश्व में शांति, प्रेम और सद्भाव यही गांधी का सपना था।




सर्वोदय समाज के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ रोड़े ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य देश के सामने मौजूद प्रमुख सवालों- महंगाई, रोजगार, बढ़ती गरीबी और शिक्षा पर संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि किसी सरकार या नेता से बदलाव नहीं आता, बदलाव युवा लाते हैं। युवाओं को अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष और पदयात्रा के संयोजक राम धीरज ने कहा कि आज देश में अधिकांश लोग सत्ता के भय से दबे हुए हैं। इस पदयात्रा के माध्यम से लोगों के अंदर का भय दूर करना ही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कॉलेज के साथियों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने निर्भीक होकर इस सभा का आयोजन किया।
सर्व सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि आज देश में गांधी के हत्यारे का महिमामंडन किया जा रहा है। उन्हें उस समय गांधी को तीन गोलियाँ मारने वाला हत्यारा कहा गया था, लेकिन वे तीन गोलियाँ आज भी जनता को लग रही हैं- धर्मांधता, कट्टर राष्ट्रवाद और संकीर्ण राष्ट्रभक्ति। उन्होंने कहा कि धर्म और मजहब के नाम पर समाज को बाँटने का काम वही लोग कर रहे हैं जो सत्ता में बैठे हैं।
सिस्टर फ्लोरीन ने कहा कि आज समाज को बाँटा जा रहा है और यह काम सत्ता में बैठे लोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रही है। उत्तर प्रदेश में सिर्फ गांधी की विरासत पर ही हमला नहीं हुआ, बल्कि आम जनता पर बुलडोज़र चलाए गए, हजारों लोग बेघर हुए और उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई। ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है।




कार्यक्रम में भारत सिंह (प्रदेश अध्यक्ष, किसान यूनियन), डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान, श्यामधर तिवारी, विष्णुधर शर्मा, हरीश चिमटी, अमित सिंह और अवधेश यादव ने भी अपने विचार रखे। संचालन डॉ. शशिकांत पांडे ने किया।
दोपहर के भोजन के बाद पदयात्रा आगे संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक पहुँची, जहाँ सरदार भगत सिंह शहीद स्मारक समिति द्वारा पदयात्रियों का स्वागत किया गया। पदयात्रियों ने भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर संचालक रामनाथ ने बताया कि शहीद स्मारक बनने से पहले यहाँ सेंट्रल जेल थी, जहाँ देश भर के स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को अमानवीय यातनाएँ दी जाती थीं। यहाँ क्रांतिकारी भूपेंद्र सान्याल, काकोरी ट्रायल के सेनानी मन्मथनाथ गुप्त, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जैसे महान लोग बंदी रहे। काला पानी से लौटे स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर राम सिंह ने संकल्प लिया था कि यहाँ शहीद स्थल बने। इसी उद्देश्य से उन्होंने 1980 में भगत सिंह शहीद स्मारक समिति की स्थापना की। प्रोफेसर नीतू सिंह ने आगरा के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन पर प्रकाश डाला।
रात में पदयात्रा धोबी घाट पंचायत पहुँची, जहाँ अंबेडकर और गांधी की प्रतिमाएँ स्थित हैं। प्रशासन द्वारा इस स्थल को निजी बिल्डर को देने और प्रतिमाओं को हटाने की योजना थी, लेकिन स्थानीय विरोध के चलते यह संभव नहीं हो पाया। पदयात्रियों ने दोनों प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।
पदयात्रा का रात्रि विश्राम गुरु का ताल गुरुद्वारा आगरा में हुआ।
यात्रा में शामिल प्रमुख प्रतिभागी
चंदन पाल, रामधीरज, अरविंद अंजुम, भूपेश भूषण, सोमनाथ रोड़े, सतीश मराठा, ध्रुव भाई, विद्याधर मास्टर, श्यामधर तिवारी, जगदीश कुमार, विकास, मानिकचंद, जोखन यादव, सरिता बहन, सिस्टर फ्लोरीन, अलीभा, अंतर्यामी बराल, सौरभ, फूल बाई, विनोद, प्रीति, रेनू, उमेश, सोनी, नंदलाल मास्टर, सूर्योगी, निधि, संजना, विवेक मिश्र, बृजेश, टैन, सचिन, अर्जुन, हिमेंद्र, दीक्षा, प्रवीण, ज्योति, सपना, पूजा, प्रियंका, नेहा, आरती, मुस्तफा, पूनम, साधना, दुष्यंत, अभिमन्यु, केसर कल्पवृक्ष, संबित भाई, हेमलता, आसिफ़, साहिल, दीपक राज, आसाम, शमशेर, संजीव, अश्मित भाई, नीता, पूजा, आंचल, अनुप्रिया।

