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पदयात्रा को मथुरा जिले में प्रवेश रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों पर आघात है – 44वां दिन

14 नवंबर 2025, आगरा

“एक कदम गांधी के साथ” पदयात्रा जो राजघाट, वाराणसी से राजघाट, दिल्ली तक गांधी के विचारों, अहिंसा, सत्य और सामाजिक समरसता के संदेश को लेकर चल रही है, आज अपने 44 वें दिन आगरा शहर में है।

धर्मनिरपेक्ष भारत के वास्तुकार थे- जवाहरलाल नेहरू

पदयात्रियों ने आज सुबह भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के मौके पर उनको श्रद्धांजलि देते हुए हिंदुस्तान को आधुनिकता, तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर एक लोकतांत्रिक व समावेशी देश बनाने के संकल्प को दोहराया। साथ ही देश आज के दौर में सत्ता द्वारा प्रायोजित सांप्रदायिकता और ध्रुवीकरण के माहौल पर चिंता व्यक्त की। सभा को संबोधित करते हुए सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने कहा कि “नेहरू असल मायने में एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और दूरगामी दृष्टि के व्यक्ति थे। उन्होंने बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में हिंदुस्तान के विकास और तरक्की की पटकथा लिखी ”।

पदयात्रा को मथुरा जिले में प्रवेश रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों पर आघात है

पदयात्रियों को मथुरा प्रशासन की तरफ़ से ये बताया गया है कि धीरेन्द्र शास्त्री के नेतृत्व में चल रही “सनातन एकता पदयात्रा” का समापन कार्यक्रम 16 नवंबर को मथुरा में होने के कारण “एक कदम गांधी के साथ” पदयात्रा को ज़िले में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह रवैया न केवल प्रशासनिक दुराग्रह को दर्शाता है, बल्कि नागरिकों के शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी गहरा प्रहार है।

यात्रा के संयोजकों ने जिलाधिकारी मथुरा से स्पष्ट कहा है कि यह पदयात्रा बनारस से लेकर अब तक लगभग 800 किलोमीटर की दूरी पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से तय कर चुकी है। ज़िले की सीमा में घुसने से पदयात्रा को रोकना अनुचित है। इसके बावजूद जिलाधिकारी द्वारा 15 और 16 नवंबर को ज़िले के बॉर्डर सील होने का हवाला बताकर यात्रा का प्रवेश रोकने की बात कही है।

मथुरा प्रशासन का रुख निराशाजनक

पदयात्रा के संयोजक राम धीरज ने कहा “यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि एक ओर सरकार, उसके मंत्री और मथुरा प्रशासन एक विभाजनकारी यात्रा को हर संभव सहयोग दे रहा है, वहीं दूसरी ओर गांधी विचार, लोकतंत्र, समानता, न्याय और बंधुत्व का संदेश लेकर चल रही हमारी शांति पदयात्रा को रोकने में जुटा है। प्रशासन का यह कदम निराशाजनक है। यह केवल प्रशासनिक असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है। सभी पदयात्रियों ने मिलकर फ़ैसला लिया है कि पदयात्रा अपने तय कार्यक्रम के अनुसार “रघुपति राघव राजा राम..ईश्वर अल्लाह तेरो नाम” के उद्घोष के साथ 15 नवंबर को सुबह आगरा से मथुरा की तरफ़ प्रस्थान करेगी और 16 नवंबर को सुबह मथुरा में प्रवेश करेगी”। इसके साथ ही देशभर के गांधीजनों और सामाजिक संगठनों से अपील की गई है कि सरकार के इस अलोकतान्त्रिक रवैये का अपने स्तर पर विरोध करें।

पदयात्रा को समर्थन दे रहे देशभर के गांधीजन एवं लोकतांत्रिक संगठनों ने मथुरा प्रशासन के इस रुख की निंदा की है और केंद्र एवं राज्य सरकार से अपील की है कि वे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करें, तथा इस शांतिपूर्ण पदयात्रा को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने दें।

निवेदक

राम धीरज – 9453047097
अरविंद अंजुम – 887471992
नंदलाल मास्टर – 9415300520
(पदयात्रा आयोजन समिति)

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