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गांधी के चंपारण सत्याग्रह के सहयोगी उपेक्षित – यात्रा का 12वां दिन

गांधी के चंपारण सत्याग्रह के सहयोगी उपेक्षित – यात्री दल

कल चंपारण के ऐतिहासिक भितिहरवा आश्रम मे यात्रा का समापन कार्यक्रम आयोजित

प्रेस विज्ञप्ति – 21 अप्रैल 2026
नरकटियागंज, पश्चिमी चंपारण

“जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ”
पटना से चंपारण यात्रा (10 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026)

आजादी के आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा तथा उन्हें सुदृढ़ करने के उद्देश्य से “जहां पड़े कदम गांधी के -एक कदम गांधी के साथ” पटना से चंपारण यात्रा निकाली गई है। बारहवें दिन की शुरुआत पश्चिमी चंपारण के नरकटियागंज स्थित विश्व मानव सेवा आश्रम में सर्वधर्म प्रार्थना के साथ हुई। प्रार्थना के बाद यात्रा दल ने आश्रम के आसपास प्रभातफेरी निकाली। इस दौरान विभिन्न चौकों पर नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गईं, जहां पर्चे भी बांटे गए। प्रभातफेरी से लौटने के बाद आश्रम के संस्थापक शत्रुघ्न झा ने यात्रा दल के सभी साथियों का खादी वस्त्र देकर स्वागत किया। इसके बाद यात्रा आगे बढ़ी।

यात्रा मुरली भरहवा पहुँची। महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के सूत्रधार सतवरिया के राजकुमार शुक्ल थे। उनके बुलावे पर ही गांधी पहली बार चंपारण आए थे। उनकी एक जमीन मुरली भरहवा में भी थी। साठी किसान आंदोलन में उन्होंने शेख गुलाब एवं शीतल राय के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। वे निलहों के शोषण से किसानों को बचाना चाहते थे। इस कारण वे निलहों और अंग्रेज अधिकारियों के निशाने पर आ गए। बेलवा कोठी के निलहा ए. सी. एम्मन ने उन्हें अपना दुश्मन मान लिया। उन्हें परेशान करने के लिए जेल भिजवाया गया, मुरली भरहवा स्थित उनके घर को नष्ट कर दिया गया और खेतों में खड़ी फसल को भी बर्बाद कर दिया गया।

इन अत्याचारों की जांच के लिए 27 अप्रैल 1917 को गांधीजी, ब्रज किशोर प्रसाद, रामनवमी प्रसाद, विन्ध्यवासिनी प्रसाद और राजकुमार शुक्ल के साथ नरकटियागंज स्टेशन से पैदल चलकर मुरली भरहवा पहुँचे। वहाँ ग्रामीणों ने विस्तार से बताया कि उनके घरों का अनाज नष्ट कर दिया गया और खेतों को जानवरों से रौंदवा दिया गया। गांधीजी ने आसपास के कई गांवों में जाकर किसानों के बयान भी दर्ज किए, जिससे सच्चाई सामने आई।

इस ऐतिहासिक स्थल पर सरकारी उपेक्षा साफ दिखाई देती है। यहाँ तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है। एक स्मारक बना है, जिस पर इस स्थान का महत्व अंकित है, तथा राजकुमार शुक्ल और संत राउत की प्रतिमाएं स्थापित हैं। लेकिन संत राउत की प्रतिमा अधूरी है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा अनावरण किए जाने के बावजूद संरक्षण के अभाव में यह स्थल उपेक्षा का शिकार है। यात्री दल ने दोनों प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद यात्रा बेलवा कोठी पहुँची। स्थानीय साथी एवं पूर्व शिक्षक छोटेलाल प्रसाद ने बताया कि मुरली भरहवा में किसानों ने गांधी को अत्याचारों की व्यथा सुनाई। गांधीजी ने उन्हें सांत्वना दी और आश्वासन दिया कि सब ठीक होगा। इसके बाद वे बेलवा कोठी पहुँचे, जहां अंग्रेज अधिकारी एस. अमन से उनका सामना हुआ। गांधीजी ने बेगारी, किसानों की पिटाई और 44–45 प्रकार के करों (जिनमें ‘हवाई टैक्स’ भी शामिल था) के बारे में प्रश्न किए, जिन्हें अमन ने स्वीकार किया। हालांकि, राजकुमार शुक्ल के घर जलाने और फसल नष्ट करने के आरोपों से उसने इनकार किया। गांधीजी ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने की चेतावनी दी, और लोगों के अनुसार उसके बाद अत्याचार बंद हो गए।

छोटेलाल ने आगे बताया कि स्वतंत्रता के समय अंग्रेजों ने यह कोठी बेच दी थी। इसे स्वर्गीय कमलाकांत वाजपेई ने खरीदा, और आज भी उनका परिवार वहाँ निवास करता है। कोठी आज भी काफी हद तक अपने मूल स्वरूप में सुरक्षित है।

इसके बाद यात्रा अमोलवा गांव में संत राउत के घर पहुँची। संत राउत चंपारण आंदोलन के प्रमुख किसान नेता थे। स्थानीय लोगों के अनुसार 27 अप्रैल 1917 को बेलवा कोठी से लौटते समय गांधीजी यहाँ ठहरे थे। उनके साथ शेख मुनी जैसे सहयोगी भी थे, जो शिक्षक होने के साथ पत्रकार भी थे और उनके लेख गणेश शंकर विद्यार्थी के माध्यम से प्रकाशित होते थे। इन घटनाओं का प्रमाण राजकुमार शुक्ल की डायरी में मिलता है।

वंशजों के अनुसार संत राउत ने चंपारण आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें अपनी कई जमीनें बेचनी पड़ीं। आज उनका यह घर जर्जर अवस्था में है। इस ऐतिहासिक धरोहर पर सरकार का ध्यान दिया जाना चाहिए।

दोपहर में यात्रा सूरज एकेडमी पहुँची, जहां छोटेलाल और उनकी टीम ने स्वागत किया तथा भोजन की व्यवस्था की।

शाम में यात्रा दल ने अमोलवा से बलुआ गांव तक पदयात्रा की। इस दौरान पूर्व मुखिया एवं उनके स्वतंत्रता सेनानी पिता ने यात्रा दल का स्वागत किया और समर्थन दिया।

यात्रा का अंतिम पड़ाव सेंट जेवियर्स स्कूल, गौनाहा रहा, जहां फादर आनंद केरकेट्टा ने स्वागत किया। यात्रा संयोजक अशोक भारत ने सभी सदस्यों का परिचय कराया।
यात्रा कल अपने अंतिम दिन भितिहरवा आश्रम पहुँचेगी, जहां समापन कार्यक्रम आयोजित होगा।

यात्रा दल में शामिल सदस्य: 
सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल, यात्रा संयोजक अशोक भारत एवं प्रदीप प्रियदर्शी, सर्व सेवा संघ के सचिव अरविंद अंजुम, उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज, सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरिन , हिमालय विजेता कीर्ति, वैज्ञानिक चेतना निर्माण कार्यकर्ता विकास कुमार, युवा कार्यकर्ता, उमेश तूरी, मयूर साखरे, पर्यावरण कार्यकर्ता अनूप कुमार, अशोक कुमार सिंह, विष्णु कुमार , पंजाब से सुनील कुमार शर्मा , सिराज अहमद ( जौनपुर)  , ब्रह्म विद्या मंदिर, विनोबा आश्रम, पवनार ज्योति बहन, गुजरात से जम्मू बहन, बंगाल से जीतेन नंदी, कस्तूरबा ट्रस्ट से संबंधित चंद्रमा, महाराष्ट्र से प्राची बहन, बेतिया से भावेश, ईश्वर चंद्र ( गाजीपुर) , एकता परिषद् के प्रदेश संयोजक के लखींद्र प्रसाद एवं मंजू बहन।

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