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संगठित जनशक्ति से ही टूटेगा भूमिहीनों के साथ अन्याय का चक्रव्यूह – पदयात्रा का 9वां दिन

संगठित जनशक्ति से ही टूटेगा भूमिहीनों के साथ अन्याय का चक्रव्यूह – सामाजिक कार्यकर्ता पंकज

सत्य और अहिंसा की ताकत से हर समस्या का हल संभव – ज्योति बहन

प्रेस विज्ञप्ति – 18 अप्रैल 2026
बेतिया, पश्चिमी चंपारण

“जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ”
पटना से चंपारण यात्रा (10 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026)

आजादी के आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा तथा उन्हें मजबूत करने के उद्देश्य से “जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ” शीर्षक से पटना से चंपारण तक यात्रा निकाली गई है। यात्रा के नौवें दिन की शुरुआत विवेकानंद रामकृष्ण विद्या मंदिर में सुबह सर्वधर्म प्रार्थना के साथ हुई। सुबह 9 बजे स्कूल के बच्चों के साथ यात्रा दल के विभिन्न सदस्यों का संवाद हुआ, जिसमें बच्चों के साथ गांधी दर्शन और उनके मूल्यों को साझा किया गया।

सुबह 11 बजे सुभाष नगर, बेतिया में सर्व सेवा संघ, सर्वोदय मंडल बिहार तथा स्थानीय आयोजक लोक संघर्ष समिति, पश्चिमी चंपारण के संयुक्त तत्वावधान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय था “चंपारण सत्याग्रह, भूदान आंदोलन और भूमि समस्या व समाधान”। इस गोष्ठी में “एक कदम गांधी के साथ” विचार यात्रा दल के सदस्यों के साथ जिले के विभिन्न गांवों के पर्चाधारी, राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।

पहले सत्र का विषय “चंपारण सत्याग्रह एवं भूदान आंदोलन” था, जिसका संचालन यात्रा संयोजक अशोक भारत ने किया तथा अध्यक्षता ऊषा बहन ने की।

मुख्य वक्ता ज्योति बहन ने महात्मा गांधी और विनोबा भावे की विरासत को स्मरण करते हुए बताया कि यह यात्रा चंपारण सत्याग्रह के 110 वर्ष तथा भूदान आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी चंपारण में गांधी जी को अहिंसा का वास्तविक अनुभव हुआ था। उन्होंने बताया कि विनोबा भावे को पहला भूदान 18 अप्रैल को पोचमपल्ली में मिला था, जब रामचंद्र रेड्डी नामक व्यक्ति ने उनके आह्वान पर 100 एकड़ भूमि दान में दी थी। देशभर के भ्रमण के दौरान विनोबा को लाखों एकड़ भूमि दान में प्राप्त हुई। गांधी और विनोबा ने यह सिद्ध किया कि सत्य, अहिंसा और प्रेम के माध्यम से किसी भी चुनौती का समाधान संभव है। उन्होंने वर्तमान समस्या की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि लोगों को वर्षों पहले भूमि के पर्चे तो मिल गए, लेकिन कब्जा नहीं मिल पाया है। इसका कारण जटिल सरकारी प्रक्रियाएं और जमींदारों का भय है। उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने का आह्वान किया और कहा कि जिस प्रकार विनोबा ने 14 वर्षों में भूमिहीनों के लिए 48 लाख एकड़ भूमि प्राप्त की, उसी प्रकार चंपारण की भूमि समस्या भी प्रेम और अहिंसा से हल हो सकती है।

ऊषा बहन ने कहा कि भूदान आंदोलन केवल भूमि वितरण का माध्यम नहीं था, बल्कि यह समाज में प्रेम, करुणा और हृदय परिवर्तन का संदेश देने वाला अभियान था। इसका उद्देश्य लोगों के दिलों को जोड़ना था। विनोबा भावे ने कहा कि
समाज में जो सकारात्मक काम काम हो रहे है, उसमें गांधी विचार की चेतना व्याप्त है। 

दूसरे सत्र का विषय “भूमि समस्या और समाधान” था, जिसकी अध्यक्षता सर्व सेवा संघ के सचिव अरविंद अंजुम ने की तथा संचालन पंकज ने किया।

सामाजिक कार्यकर्ता पंकज ने कहा कि भूमिहीनों और पर्चाधारियों के संघर्ष में चार प्रमुख बाधाएं हैं पहली, धारा 353 का दुरुपयोग, जिसके तहत न्याय की मांग करने वालों पर ही मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं दूसरी, “अभियान दखल” की विफलता, जिसमें भूमि मिलने के बाद भी लोगों को पुनः बेदखल कर दिया जाता है
तीसरी, कानूनी प्रक्रिया में अत्यधिक देरी। कानून के अनुसार 90 दिनों में निर्णय होना चाहिए, लेकिन वर्षों तक कब्जा नहीं मिल पाता। उन्होंने बताया कि चंपारण में भूमि विवाद से जुड़े लगभग 94 मामले ऐसे हैं, जो पिछले 40 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं और लगभग 15,000 एकड़ भूमि विवाद में फंसी हुई है। बिहार में भूमि निस्तारण की प्रक्रिया सात स्तरों पर होने के कारण अत्यधिक जटिल और धीमी है, जबकि कर्नाटक में यह प्रक्रिया केवल दो स्तरों तक सीमित है, जिससे वहां अपेक्षाकृत शीघ्र निर्णय हो पाता है।

चौथी, एक भ्रष्ट तंत्र का चक्रव्यूह, जिसमें वकील, प्रशासनिक अधिकारी, हर राजनीतिक दल में नेता, मीडिया शामिल हैं, जो नहीं चाहते कि भूमिहीनों को भूमि मिले ।

अरविंद अंजुम ने कहा कि विनोबा भावे का भूदान आंदोलन किसी अन्य आंदोलन की प्रतिक्रिया के रूप में या पूर्व नियोजित योजना के तहत शुरू नहीं हुआ था, बल्कि यह स्वाभाविक रूप से विकसित हुआ। यह क्रमिक रूप से भूदान से ग्रामदान और आगे राज्यदान तक विस्तृत हुआ।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक व्यक्तित्व वाले विनोबा जी ने भारत की सबसे बड़ी भौतिक समस्या, भूमि असमानता, का समाधान अपने अनूठे तरीके से करने का प्रयास किया। उन्होंने स्त्रियों को अध्यात्म, संन्यास और ब्रह्मचर्य में पुरुषों के समान अधिकार देकर एक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी कहा कि भूमि समस्या के समाधान के लिए बेहतर दस्तावेजीकरण, स्पष्ट विमर्श निर्माण, चंपारण जैसी जगहों की वास्तविक स्थिति का प्रचार-प्रसार, सामाजिक जागरूकता और सत्याग्रह के माध्यम से जन लामबंदी आवश्यक है।

गोष्ठी को समाजवादी नेता लक्ष्मण गुप्ता, माले नेता बिरेन्द्र गुप्ता, उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज तथा लोक संघर्ष समिति की नेता फूलकली देवी ने भी संबोधित किया।

उन्होंने पर्चाधारियों, दोन क्षेत्र में 1990 से वन भूमि पर खेती करने वालों तथा बेतिया राज की भूमि पर वर्षों से निवास कर रहे लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरे जिले में सघन अभियान और व्यापक सत्याग्रह चलाने पर बल दिया।

शाम में यात्रा दल ऐतिहासिक हजारीमल धर्मशाला पहुंचा। वर्ष 1917 में चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी बेतिया स्थित इसी धर्मशाला में ठहरे थे, जिसे ब्रिटिश दबाव के बावजूद हजारीमल झुंझुनवाला ने उपलब्ध कराया था। यह स्थान आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना, जहां किसान अपने अत्याचारों की कहानी सुनाते थे और गांधी जी की टीम उनके बयान दर्ज करती थी। इस टीम में राजेंद्र प्रसाद और आचार्य कृपलानी जैसे नेता शामिल थे।

वर्तमान में यह ऐतिहासिक इमारत जर्जर अवस्था में है। दीवारों पर पेड़ उग आए हैं, चारों ओर कचरा फैला है और यह एक शॉपिंग मॉल की छाया में उपेक्षित पड़ी है। यद्यपि बिहार सरकार इसे गांधी सर्किट का हिस्सा मानती है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह धरोहर तेजी से नष्ट हो रही है।

शाम को यात्रा चनपटिया पहुंची, जहां स्वतंत्रता सेनानी गुलाब चंद्र गुप्ता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद पदयात्रा के माध्यम से यात्रा दल ने लोगों के बीच अपना संदेश पहुंचाया।

यात्रा दल में शामिल साथी

यात्रा संयोजक अशोक भारत, सर्व सेवा संघ के सचिव अरविंद अंजुम, उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज, सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरिन, हिमालय विजेता कीर्ति, वैज्ञानिक चेतना निर्माण कार्यकर्ता विकास कुमार, युवा कार्यकर्ता उमेश तूरी, मयूर साखरे, पर्यावरण कार्यकर्ता अनूप कुमार, अशोक कुमार सिंह, विष्णु कुमार, तमिलनाडु से एस श्रीनिवासन, पंजाब से सुनील कुमार शर्मा, सिराज अहमद, ब्रह्म विद्या मंदिर विनोबा आश्रम पवनार से ज्योति बहन, गुजरात से जम्मू बहन, बंगाल से जीतेन नंदी, कस्तूरबा ट्रस्ट से संबंधित चंद्रमा तथा महाराष्ट्र से प्राची बहन।

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