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तीसरा दिन – बैरकपुर से चुंचुड़ा तक करीब 26 किलोमीटर की पदयात्रा

भाटपाड़ा में बंगाल पीस सेंटर द्वारा किए जा रहे सांप्रदायिक सद्भाव एवं रचनात्मक पहला से रूबरू हुए पदयात्री

बंगाल पीस सेंटर गांधीजी के रचनात्मक काम को आगे बढ़ाते हुए समाज को जोड़ने का काम कर रहा है।” – चंदन पाल

“जो हमसे नफरत करे, उससे भी प्रेम करना ही सच्चे प्रेम की शक्ति है।” – अशोक भारत

4 अक्टूबर, चुंचुड़ा। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा के तीसरे दिन यात्रियों ने बैरकपुर से चुंचुड़ा तक करीब 26 किलोमीटर की यात्रा की। प्रेम, शांति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर निकली यह पदयात्रा 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन पहुंचेगी। तीसरे दिन देश के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 17 राज्यों के पदयात्रियों ने इसमें हिस्सा लिया।

सुबह यात्रा दल बैरकपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने पदयात्रा के संदेश के बारे में जानकारी दी।

बंगाल पीस सेंटर की पहल से पदयात्रियों ने जाना सद्भाव का प्रयास

इसके बाद पदयात्रा भाटपाड़ा पहुंची, जहां बंगाल पीस सेंटर, भाटपाड़ा से जुड़े बच्चों ने पुष्पवर्षा कर यात्रियों का स्वागत किया। इस अवसर पर स्वागत सभा का आयोजन किया गया। बंगाल पीस सेंटर, भाटपाड़ा के संयोजक विजय राजक ने कहा कि वर्ष 2019 में भाटपाड़ा के राजनीतिक संघर्ष के दौरान कई लोगों की जान गई, घर-दुकानें जलाई गईं और परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद बंगाल पीस सेंटर के माध्यम से प्रभावित परिवारों, विशेषकर बच्चों की शिक्षा, ट्यूशन और अन्य आवश्यक सहयोग का प्रयास शुरू किया गया। जिन महिलाओं का रोजगार छिन गया था, उनके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य, सामाजिक और सहकारी माध्यमों से भी सहायता पहुंचाई गई। बच्चों के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता, प्रशिक्षण और कंप्यूटर शिक्षा जैसी पहल भी शुरू की गईं। उन्होंने कहा कि यह प्रयास 2019 से लगातार जारी है और इसमें अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक सहयोग और संवेदनशीलता का परिणाम है।

पदयात्रा के सह संयोजक मोहित ने कहा कि विजय राजक और अन्य साथियों के साथ मिलकर दोनों समुदायों के बीच टूटे रिश्तों को फिर जोड़ने की पहल हुई। महिलाओं और लड़कियों को इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। दोनों समुदायों की महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ कौशल साझा करने और सहयोग की पहल की। मुस्लिम समुदाय की लड़कियों द्वारा हिंदू महिलाओं को सिलाई सिखाने जैसी पहलों से आपसी विश्वास बढ़ा और यह प्रयास आगे चलकर सहकारी संस्था के रूप में विकसित हुआ।

सेंटर से जुड़ी सबाना ने कहा कि इस पहल का आधार प्रेम, भाईचारा और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता है। उन्होंने कहा कि हम भले ही सूरज न बन पाएं, लेकिन एक दीपक की तरह अपनी रोशनी जरूर दे सकते हैं। जब किसी की आंखों में आंसू हों तो हमारा दामन उसके लिए हो और जब किसी के जीवन में खुशी हो तो हमारा कंधा उसके साथ हो। उन्होंने कहा कि प्रेम, ईमानदारी और इंसानियत के साथ एकजुट रहना ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि भाटपाड़ा में आकर उन्हें महसूस हुआ कि जिस उद्देश्य को लेकर पदयात्रा निकली है, उसे यहां के लोग वर्षों से जमीन पर साकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों की भावना को नए रूप में आगे बढ़ाया जा रहा हैं। लोगों को काम और सम्मानजनक जीवन के अवसर देने के साथ समाज को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भाटपाड़ा को ‘मिनी भारत’ बताते हुए कहा कि यहां अलग-अलग धर्म, भाषा और प्रदेशों के लोग साथ रहते हैं। पदयात्रा का उद्देश्य भी सभी समुदायों को साथ लेकर आगे बढ़ना और प्रेम, भाईचारे तथा सामाजिक सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।

सर्व सेवा संघ प्रकाशन के संयोजक अशोक भारत ने कहा कि विनोबा भावे ने प्रेम की शक्ति के प्रगटीकरण पर जोर दिया था। जो हमसे प्रेम करे, उससे प्रेम करना आसान है, लेकिन जो हमसे नफरत करे, उससे भी प्रेम करना ही सच्चे और सक्रिय प्रेम की शक्ति है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने नोआखाली में प्रेम और अहिंसा के माध्यम से हिंसा के बीच शांति का प्रयास किया था। आज जब समाज में नफरत और विभाजन की प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं, तब गांधीजन होने के नाते लोगों के बीच जाकर सत्य, प्रेम और अहिंसा का संदेश देना हमारी जिम्मेदारी है।

आइकैन के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद मूर्ति ने कहा कि आज गांधी को केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि मानवता और दुनिया को बेहतर दिशा देने वाले विचार के रूप में याद करने की जरूरत है। पर्यावरण संकट, ग्लोबल वार्मिंग, हिंसा और बढ़ते सामाजिक तनाव के दौर में गांधी के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि गांधी के जीवन और विचारों के केंद्र में सत्य और अहिंसा थे और अहिंसा को उन्होंने कमजोरी नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी रचनात्मक शक्ति माना।

कार्यक्रम के दौरान लालन एकेडमी से जुड़ी तापसी राय चौधरी ने लालन फकीर का गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद सबाना एवं सेंटर के बच्चों ने ‘तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा’ गीत प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक प्रस्तुति में सबाना खातून, अविदा खातून, अंजली बांसफोड़, अदिवा असेलम, नेहा कुमारी पासवान, सजना साव, रुक्सार परवीन, इजना साव, अफरीन खातून, सादमा खातून और इसरत परवीन सहित अन्य बच्चों ने हिस्सा लिया।

भाटपाड़ा में बंगाल पीस सेंटर की ओर से यात्रियों के लिए भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई। इसके बाद यात्रा फेरी के माध्यम से हुगली नदी पार कर चुंचुड़ा फेरी घाट पहुंची। फेरी यात्रा के दौरान पदयात्रियों ने गीत प्रस्तुत किए, जिसमें फेरी में मौजूद अन्य लोग भी शामिल हुए।

चुंचुड़ा में बंकिम भवन का दौरा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ दिन का समापन

चुंचुड़ा पहुंचने के बाद पदयात्री ऐतिहासिक बंकिम भवन (वंदे मातरम् भवन) पहुंचे। बंकिम भवन महान बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का आवास रहा है। पदयात्रियों ने भवन में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से जुड़ी तस्वीरें, उनकी साहित्यिक कृतियां तथा ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास से संबंधित जानकारी देखी।

यात्रा अपने अंतिम पड़ाव मां अन्नपूर्णा लॉज, चुंचुड़ा पहुंची, जहां एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स (APDR) के साथियों ने यात्रियों का स्वागत किया। जलपान के बाद सांस्कृतिक सभा आयोजित हुई, जिसमें स्थानीय कलाकारों और बच्चों के साथ पदयात्रियों ने भी प्रस्तुतियां दीं।

तीसरे दिन पदयात्रियों ने करीब 26 किलोमीटर की यात्रा पूरी की। पदयात्रा के चौथे दिन चुंचुड़ा से त्रिवेणी की ओर प्रस्थान करेगी।

पदयात्रा में आइकैन के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद मूर्ति, शेख हुसैन, राजश्री, निधि, अलीभा, सिस्टर फ्लोरिना, मोहित, देबाशीष, बिस्वजीत गोराई, विष्णु, अनूप कुमार, आयशा, अमृता, आसमा आदिवासी, रीपांजल लकड़ा, कुंती बोइपाई, निधि मुंडा, अजय बेसरा, किरण, पंकज श्रीवास्तव, सुख चन्द्र झा, सिद्धार्थ, शिव शंकर दास, सोमित आचार्य, बशीर, चंदन पाल, अशोक भारत, बिरेन डेका, सतीश मराठा, बिपिन, जितेन नंदी, श्रीनिवासन, एम.एच. पाटिल, विक्रम पाटिल, उमेश टुरी, बिप्लब नायक, अरविंद अंजुम, अमृत बाउरी, सोहन, अभिजीत, सतिया, अज़हर, इस्ताक, रामाकांत, आयुष, सुशांत मोहंती, किरण वीर, आयशा खातून, ससतरंजन पाल, रॉबिन जाना, तरुण जाना, शांतू सरदार, गणेश कुमार, विजय राजक, शुभप्रतिम चौधरी, फासिक उलिस्लाम, संविद्र सरकार, तापस विश्वास, जगदीश कुमार और विकास कुमार सहित अन्य पदयात्री शामिल रहे।

चूंचड़ा में सुबीर भट्टाचार्य,अमल घोष आदि ने आयोजन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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