बोलपुर, पश्चिम बंगाल, 15 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को कोलकाता की हैदरी मंजिल से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा 225 किलोमीटर की दूरी तय कर अपने चौदहवें दिन भेदिया से आगे बढ़ते हुए बोलपुर पहुँची। सर्व सेवा संघ एवं अन्य लोकतांत्रिक संगठनों द्वारा आयोजित यह पदयात्रा प्रेम, शांति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का संदेश दे रही है। 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन में राखी उत्सव के साथ यात्रा का समापन होगा। इसमें देश के लगभग 15 राज्यों से आए पदयात्री शामिल हैं।
सर्वधर्म प्रार्थना और गीतों के साथ हुई दिन की शुरुआत
दिन की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना और नए पदयात्रियों के स्वागत के साथ हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए नए साथियों ने अपना परिचय दिया। सुबह 9 बजे पदयात्री गीतों और नारों के साथ भेदिया से रवाना हुए। कोलकाता से आए बिप्लब नायक रास्ते भर स्थानीय लोगों से संवाद करते हुए यात्रा का संदेश साझा करते रहे। सुबह 11 बजे पदयात्रियों ने अजय नदी पार कर बीरभूम जिले में प्रवेश किया।
नुक्कड़ सभा में प्रेम और सद्भाव का संदेश
काशीपुर बाईपास, बोलपुर में आयोजित नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए भागलपुर के प्रोफेसर मनोज कुमार ने कहा कि बंगाल और शांतिनिकेतन से महात्मा गांधी का गहरा संबंध रहा है। गांधीजी सात बार शांतिनिकेतन आए और वहाँ कुल 31 दिन बिताए। उन्होंने कहा कि पदयात्रा का उद्देश्य गांधीजी के पदचिह्नों की खोज करना और उनके प्रेम व सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा नफरत फैलाने वाली ताकतों के सामने चुनौती है। नफरत कितनी भी मजबूत हो, उसका मुकाबला प्रेम और सद्भाव से किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में जमुई और डाल्टनगंज में भी ऐसी यात्राएँ आयोजित की जाएँगी।
सभा में बनारस से आए नंदलाल मास्टर ने “गाएगा, गाएगा ज़माना गाएगा, गीत एकता का ज़माना गाएगा…” सहित एकता और जनचेतना से जुड़े गीत प्रस्तुत किए। इसके बाद टैगोर, नानक, फकीर और कबीर के जनगीतों के साथ यात्रा आगे बढ़ी।
दोपहर में पदयात्री अपने पड़ाव मिलन तीर्थ, बोलपुर पहुँचे, जहाँ भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई। शाम को वे उदयन कल्याण केंद्र, तिलुटिया आश्रम पहुँचे।
आचार्य शूद्रत्तम का सपना था ‘विश्व परिवार’
तिलुटिया आश्रम के सचिव सुरजीत ने पदयात्रियों को आचार्य श्री शूद्रत्तम के जीवन और विचारों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आचार्यजी ने शिक्षा प्राप्त की और भ्रष्टाचार के विरोध में सरकारी नौकरी छोड़कर अपना जीवन सामाजिक सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
सुरजीत ने बताया कि 1955 में दिल्ली में आयोजित विश्व धर्म सभा में ‘मानव धर्म’ को मान्यता नहीं मिलने से आचार्यजी को गहरा आघात पहुँचा। उन्होंने मनुष्य की पहचान जाति और धर्म के बजाय उसके कर्मों से किए जाने पर जोर दिया।
आचार्य शूद्रत्तम ने बापूजी आश्रम की स्थापना की, जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग साथ रहते और काम करते थे। आश्रम में 11 परिवार 55 बीघा जमीन पर सामूहिक रूप से खेती और अन्य कार्य करते थे तथा श्रम और उत्पादन का बराबर बँटवारा होता था। इस व्यवस्था का विरोध हुआ और आचार्यजी को सात साल जेल में बिताने पड़े।
सुरजीत ने कहा कि सामूहिक जीवन की वह व्यवस्था भले ही बंद हो गई, लेकिन आचार्यजी के विचार आज भी जीवित हैं। उनका सपना एक ऐसे ‘विश्व परिवार’ का था, जहाँ जाति, धर्म और देश की सीमाएँ इंसानों के बीच दीवार न बनें और सभी प्रेम तथा भाईचारे के साथ रहें।
प्रेम और सद्भाव से ही बनेगा बेहतर समाज: चंदन पाल
सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि समाज में बढ़ती नफरत, हिंसा और धार्मिक विभाजन के बीच प्रेम, अहिंसा और बंधुत्व का संदेश फैलाना पदयात्रा का उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि इससे पहले बनारस से दिल्ली तक 56 दिनों की ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा आयोजित की गई थी।
बर्धमान में चम्पा हाजरा नाम की महिला द्वारा पदयात्रा के लिए 20 रुपये का योगदान देने की घटना साझा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रेम का जवाब प्रेम से ही मिलता है। उन्होंने लोगों से गांधीजी के विचारों को अपनाने और सभी धर्मों के बीच आपसी सम्मान व सद्भाव बढ़ाने की अपील की।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में बाउल संगीत और बच्चों की नाट्य प्रस्तुति
रात में आश्रम परिसर में सांस्कृतिक सभा आयोजित की गई। इसमें सुप्रसिद्ध बाउल कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को संगीतमय बनाया। आनंत दास, रीना दास, शुभेन्द्र जी, तनम्य दास, मानिक और निर्मल सहित कलाकारों ने कार्यक्रम में भाग लिया। अंत में बच्चों ने नाटक का मंचन किया।
पदयात्रा में शामिल साथी
चौदहवें दिन की पदयात्रा में नंदलाल मास्टर, शेख हुसैन, सोमनाथ रोड़े, माधव, बालाजी पोम्पलावर, डॉ. अशोक, डॉ. बालाजी, डॉ. गाडेकर, डॉ. घाडगिने, अबु सुलेमान, निधि, मनोज कुमार, श्यामल मुखर्जी, उमेश प्रसाद, अलीभा, अनोखेलाल, देबाशीष, अंकुर शाश्वत, अर्पिता, नागेश, प्रेम, स्वाति, पंकज श्रीवास्तव, निशान, तरुण कुमार, बिस्वजीत गोराई, विष्णु, अनूप कुमार, शाहिद कमल, आसमा आदिवासी, कीर्ति, चंदन पाल, बिरेन डेका, तरुण, चांद मुहम्मद, सतीश मराठा, जितेन नंदी, श्रीनिवासन, साम्भव, बैद्यनाथ दे, विक्रम पाटिल, बिप्लब नायक, अमिताभ, अरविंद अंजुम, फरहा खातून, नसीमा खातून, इस्तियाक, उमेश तुरी, सौरभ महापात्रा, डाॅ जयंता, रनजीत मुखोपाध्य, सुशांत मोहंती, मदन मोहन, रामधीरज, सतेंद्र सिंह, आयशा खातून, मकु हेम्ब्रम, मोइनुल हक़, शल्मा खातून, मोहित रणदीप, गोपाल माड़ी, संगीता महतो, सुचेता रे, जोनाकी खातून, किरण वीर, सतरंजन पाल, सुतापा, शांतू सरदार, राज रानी खोसला, स्नेह कुमार सिंह, अनिक, नूर आलम, सबीना, चिरंजीत, अरुंधति सेनगुप्ता, मानस घोष, सोहोन, सौरभ महापात्रा, परमिता, पुष्पराज, बसीर, सबीना, जगदीश कुमार और विकास कुमार सहित अन्य पदयात्री शामिल रहे।
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