News

पदयात्रा का शांतिनिकेतन में समापन, प्रेम,शांति-सद्भाव और संविधान की रक्षा का लिया संकल्प

15 दिनों में लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा कर शांतिनिकेतन पहुँचे 15 राज्यों के पदयात्री; राखी उत्सव के जरिए दिया प्रेम, बंधुत्व और एकता का संदेश

गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को कोलकाता के हैदरी मंजिल (गांधी भवन) से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा का समापन 16 अक्टूबर को बोलपुर, शांतिनिकेतन में हुआ। सर्व सेवा संघ तथा अन्य लोकतांत्रिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस पदयात्रा में देश के लगभग 15 राज्यों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा के दौरान पदयात्रियों ने प्रेम, शांति, अहिंसा, सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। शांतिनिकेतन में राखी उत्सव और समापन सभा के साथ यात्रा का एक और चरण का समापन हुआ।

टैगोर की ऐतिहासिक विरासत से परिचित हुए पदयात्री, राखी उत्सव के जरिए दिया प्रेम और एकता का संदेश

16 अक्टूबर की सुबह करीब सात बजे पदयात्री दल मिलन तीर्थ, बोलपुर से नारों और गीतों के साथ शांतिनिकेतन पहुँचा। स्थानीय साथियों ने पदयात्रियों को ऐतिहासिक विश्वभारती परिसर के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कराया और उनसे जुड़े इतिहास की जानकारी दी।

बंगाल से पदयात्रा में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता मनीषा बनर्जी ने 16 अक्टूबर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने लोगों के बीच प्रेम, एकता और बंधुत्व को मजबूत करने के लिए राखीबंधन का आह्वान किया था। इस दौरान उन्होंने नाखोदा मस्जिद, कोलकाता जाकर मौलानाओं को भी राखी बाँधी और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया। उन्होंने इस दिन को दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी के सत्याग्रह और उनके कारावास की घटना से भी जोड़ा।

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने बताया कि माझीआड़ा,पुरुलिया के बुनियादी विद्यालय के बच्चों ने रातभर जागकर अपने हाथों से सूत की राखियाँ तैयार की थीं। उन्होंने इस पहल में योगदान देने वाले आश्रम के साथियों, विशेषकर मानिक दासगुप्ता, और बच्चों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इसके बाद सभी पदयात्रियों ने एक-दूसरे को राखी बाँधकर प्रेम, सद्भाव और बंधुत्व का संकल्प लिया।

डॉक्यूमेंट्री और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ समापन समारोह की शुरुआत

सुबह नौ बजे बोलपुर स्थित सानाई लॉज में समापन कार्यक्रम की शुरुआत हुई । कार्यक्रम की शुरुआत 2025 में बनारस से दिल्ली तक आयोजित लगभग 1,000 किलोमीटर की ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म के प्रदर्शन से हुई। इसके बाद शांतिनिकेतन के स्थानीय साथियों ने गीत और सामूहिक नृत्य सहित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।

आयोजकों ने विभिन्न राज्यों से आए पदयात्रियों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया और उन्हें टैगोर के चित्र की प्रतिकृति भेंट की।

“इंसानियत के सफर को आगे बढ़ाना ही पदयात्रा का मूल संकल्प”: अरविंद अंजुम

सर्व सेवा संघ के मंत्री और पदयात्रा के आयोजकों में से एक अरविंद अंजुम ने कहा कि गांधी, बुद्ध और रवींद्रनाथ ठाकुर जैसे महान व्यक्तित्वों के विचारों को केवल याद करना पर्याप्त नहीं है; उन्हें वर्तमान जीवन में अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा करना नहीं, बल्कि इंसानियत के सफर को आगे बढ़ाना है। बुद्ध से गांधी और टैगोर तक मानवता की यात्रा प्रेम, शांति और सद्भाव की निरंतर परंपरा रही है।

उन्होंने 1905 के राखीबंधन आंदोलन और 1947 में हैदरी मंजिल में गांधीजी के सांप्रदायिक सद्भाव के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी समाज को बेहतर बनाने के लिए इन मूल्यों को सामूहिक रूप से अपनाने की जरूरत है। उन्होंने ऐसी दुनिया बनाने का आह्वान किया जहाँ युद्ध, हिंसा, शोषण, अन्याय और भेदभाव के लिए कोई जगह न हो तथा लोग सीमाओं से ऊपर उठकर प्रेम और शांति के साथ रह सकें।

“संकीर्ण राष्ट्रवाद से ऊपर उठकर पड़ोसी देशों के साथ शांति और संवाद बढ़ाने की जरूरत”: चंदन पाल

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि गांधीजी के शांति और सद्भाव के संदेश को भारत तक सीमित न रखकर पड़ोसी देशों तक पहुँचाने की आवश्यकता है। उन्होंने राजनीति के बढ़ते अमानवीकरण, नागरिक अधिकारों के हनन और संकीर्ण राष्ट्रवाद पर चिंता जताते हुए गांधीजी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आदर्शों को सच्ची देशभक्ति का आधार बताया।

उन्होंने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और अन्याय के खिलाफ बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, वकीलों, खिलाड़ियों, कलाकारों और लोकतांत्रिक संगठनों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने देशभर में गांधीवादी और लोकतांत्रिक विचारों पर आधारित साझा मंच बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

“समाज में मौजूद धार्मिक, लैंगिक और क्षेत्रीय भेदभाव को समझना जरूरी”: आयशा खातून

पदयात्री आयशा खातून ने यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि रास्ते में उन्हें प्रेम, अपनापन और धार्मिक सद्भाव के उदाहरण देखने को मिले, लेकिन समाज में मौजूद भेदभाव और असमानता भी सामने आई। बैरकपुर में एक परिवार के घर ठहरने के अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें दूसरे धर्म के प्रतीकों के बीच रहने में झिझक हुई, लेकिन परिवार ने उन्हें सहजता से अपनाया। इस अनुभव ने आपसी विश्वास और इंसानियत का महत्व समझाया।

उन्होंने महिलाओं को नेतृत्व के कम अवसर मिलने, बेरोजगारी और भाषा व क्षेत्र के आधार पर होने वाले भेदभाव पर चिंता जताई। उन्होंने लोगों से धर्म, भाषा, लिंग और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर एकजुट होने तथा भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

“गांधी को समझने के लिए किताबों से बाहर निकलकर समाज के बीच जाना जरूरी”: आसमा आदिवासी

मध्य प्रदेश से आईं आसमा आदिवासी ने कहा कि पदयात्रा ने उन्हें गांधीजी के विचारों और बंगाल में उनके योगदान को करीब से समझने का अवसर दिया। गाँवों में लोगों से संवाद, भाषा की बाधाओं और प्रकृति के बीच यात्रा करने के अनुभवों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया।

उन्होंने कहा कि गांधीजी को केवल किताबों से नहीं समझा जा सकता, बल्कि उनके पदचिह्नों पर चलकर और समाज के बीच जाकर उनके विचारों को महसूस करना होगा। उनके अनुसार, यात्रा जीवन को समझने का माध्यम है और प्रेमपूर्ण व्यवहार विश्व शांति का आधार है।

“संविधान की रक्षा और नफरत मिटाने के लिए जन आंदोलन बनें पदयात्राएँ”: सोमनाथ रोड़े

महाराष्ट्र से आए सोमनाथ रोड़े ने कहा कि पदयात्रा संविधान की रक्षा, इंसानियत को मजबूत करने और धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे नफरत व विभाजन को समाप्त करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पैदल यात्रा लोगों के दिलों तक पहुँचने और उन्हें जागरूक करने का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने हर क्षेत्र में स्थानीय समस्याओं को लेकर ऐसी यात्राएँ आयोजित करने और गांधीजी के विचारों को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक और संगठित करना जरूरी है।

हरियाणा से सतीश मराठा, झारखंड से उमेश तुरी, बनारस से सिस्टर फ्लोरिन, श्रीकांत गायकवाड़ तथा अन्य पदयात्रियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

चित्रकार पीयूष मुखर्जी ने चित्र के माध्यम से दिया शोषण-मुक्त समाज का संदेश

समापन कार्यक्रम में चित्रकार पीयूष मुखर्जी ने अपने हस्तनिर्मित चित्र के माध्यम से शोषण के विरोध और शांतिपूर्ण समाज का संदेश दिया। उनकी कलाकृति में गांधीजी के अहिंसा के विचारों और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन के महत्व को दर्शाया गया।

संविधान, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा का सामूहिक संकल्प

कार्यक्रम के अंत में पदयात्रियों ने संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, नागरिक अधिकारों और सामाजिक समानता की रक्षा के साथ शांति तथा अहिंसा के मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लिया। संकल्प-पत्र में जाति, धर्म और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव का विरोध करने, स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों और आदर्शों की रक्षा करने, गांधीजी के स्वराज एवं आत्मनिर्भरता के विचारों को आगे बढ़ाने और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया गया।

संकल्प-पत्र का पाठ जीतेन नंदी ने बांग्ला में और शेख हुसैन ने हिंदी में किया। कार्यक्रम का संचालन पदयात्रा संयोजक मोहित रणदीप और बिस्वजीत घोड़ोई ने किया। अंत में स्थानीय साथियों ने रवींद्रनाथ ठाकुर की मूल रचना ‘भारत भाग्य विधाता’ के पाँच अंतरे सामूहिक रूप से गाए। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ समारोह संपन्न हुआ।

समापन दिन में शामिल साथी

चंदन पाल, गौरांग महापात्र,मोहित रणदीप, बिश्वजीत घोड़ोइ, देबाशीष बेरा, मनीषा बनर्जी, अरविंद अंजुम, शेख हुसैन, सोमनाथ रोड़े, नंदलाल मास्टर, सिस्टर फ्लोरीन, फा टोनी,निधि, माधव, बालाजी कोम्पलावर, डॉ. अशोक, डॉ. बालाजी, डॉ. गाडेकर, डॉ. घाडगिने, अबु सुलेमान, सुरजीत, श्यामल मुखर्जी, उमेश प्रसाद, अलीभा, अनोखेलाल, लयली खातून, धनु सरदार, तरुण लाहा, अंकुर शाश्वत, प्रेम शर्मा, स्वाति कुमारी, पंकज श्रीवास्तव, निशान सिंह, तरुण कुमार, विष्णु कुमार, अनूप कुमार, आसमा आदिवासी, कीर्ति, बिरेन डेका, जगदीश कुमार,तरुण, सतीश मराठा, सुनील शर्मा, श्रीनिवासन, साम्भव चाटी , बैद्यनाथ दे, विक्रम पाटिल, बिप्लब नायक, सुब्रत सेन, खोकन कुंडू, अमिताभ, फरहा खातून, आयशा खातून, एम.एच. पाटिल, नसीमा खातून, इस्ताक, उमेश तुरी, सौरभ महापात्रा, डॉ. जयंता, रनजीत मुखोपाध्य, मदन मोहन, मकु हेम्ब्रम, मोइनुल हक़, सलमा खातून, नारायण हजाम, गोपाल मारडी, संगीता महतो, सुचेता रे, जोनाके खातून, सत्य नारायण सरकार, तापस कुमार, मो. मिराजउल्ला, प्रणीता सिन्हा, पापिया घोष, प्रणति बिस्वास, किरण वीर, सत्य रंजन पाल, सुतापा, शांतू सरदार, राज रानी खोसला, स्नेह कुमार सिंह, पुष्पराज,अनिक, नूर आलम, सबीना, चिरंजीत, अरुंधति सेनगुप्ता, मानस घोष, सोहोन, परमिता, बसीर, जगदीश कुमार, विकास कुमार, सुधामय हलदर, श्यामली बासु, तपति घोष, मितु चट्टोपाध्याय, खोंदकार आपेल रालेमेन, साहिदुल हसन, मितु बारिक, बर्नाली, मो. हिलाल उद्दीन, ओम प्रकाश सिंह, शुभ प्रतिम, सुब्रत रॉय, प्रदीप दासगुप्ता, माणिक प्रसाद दासगुप्ता, ननीगोपाल महतो, मधुमिता दासगुप्ता, ऋचिता दासगुप्ता, एस.के. मो. नासिरुद्दीन, शिशिर कुमार पाल, सुनी थानदार, काजल पारिया, श्यामल मुखिया, चंद्रमोहन, रूपक जाना, एस.के. अनामुल, मनीषा बारिक, सोमेंद्र,अभिजीत मित्र,काजल मुखर्जी,आलोक,अलीम, ताहेर,पीयूष,अरविंद मानव एवं अन्य साथी शामिल रहे।

adminsss

Recent Posts

225 किलोमीटर की यात्रा कर 14वें दिन बोलपुर पहुँची गांधी पदयात्रा

बोलपुर, पश्चिम बंगाल, 15 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को कोलकाता की…

5 days ago

पदयात्रा के 13वें दिन गोबिंदोपुर और भेदिया में शांति, प्रेम, सद्भाव का संदेश

संविधान की रक्षा और किसानों-मजदूरों को न्याय दिलाना हर नागरिक का कर्तव्य: सोमनाथ रोड़े भेदिया,…

7 days ago

शांति और प्रेम केवल कुछ लोगों की नहीं, पूरी दुनिया की आकांक्षा है” – पदयात्रा का 12वां दिन

शांति और प्रेम केवल कुछ लोगों की नहीं, पूरी दुनिया की आकांक्षा है” - अरविंद…

1 week ago

निष्पक्ष चुनाव संसदीय लोकतंत्र की बुनियाद – पदयात्रा का 11वां दिन

निष्पक्ष चुनाव संसदीय लोकतंत्र की बुनियाद, चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी जरूरी: पदयात्री दल…

1 week ago

पदयात्रियों ने लिया लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा का संकल्प – 10वां दिन

जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती पर पदयात्रियों ने लिया लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा…

1 week ago

जंतर-मंतर पर दमन और गिरफ्तारियों के खिलाफ पदयात्रियों की आवाज़ बुलंद – 9वां दिन

जंतर-मंतर पर लोकतंत्र की आवाज़ उठाने वालों के दमन और गिरफ्तारियों के खिलाफ पदयात्रियों ने…

2 weeks ago