निष्पक्ष चुनाव संसदीय लोकतंत्र की बुनियाद, चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी जरूरी: पदयात्री दल
नुक्कड़ सभा में संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा का आह्वान
बिल्वाग्राम, 12 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा अपने ग्यारहवें दिन तालिद, बर्धमान से आगे बढ़ते हुए बिलोग्राम पहुंची। सर्व सेवा संघ एवं अन्य लोकतांत्रिक संगठनों द्वारा आयोजित यह पदयात्रा प्रेम, शांति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है। 16 अक्टूबर को यात्रा शांतिनिकेतन पहुंचेगी। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 15 राज्यों के पदयात्री इसमें शामिल हैं।
स्कूली बच्चों से संवाद: विविधता में एकता का संदेश
सुबह 8 बजे तालिद स्थित ईस्ट-वेस्ट मॉडल स्कूल की असेंबली के दौरान पदयात्रियों और विद्यार्थियों के बीच संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पदयात्री दल के प्रमुख साथी देबाशीष ने यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पदयात्रा समाज में शांति, प्रेम और अहिंसा का संदेश फैलाने के लिए निकाली गई है।
सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने बच्चों से सरल भाषा में संवाद करते हुए कहा कि अलग-अलग भाषाओं, धर्मों और जातियों के बावजूद सभी को साथ लेकर चलने से ही देश का विकास संभव है।
इस अवसर पर जादवपुर विश्वविद्यालय के पीएचडी शोधार्थी साम्भव ने बांग्ला गीत प्रस्तुत किया। मध्य प्रदेश के शहडोल से आए इस्तियाक और राजस्थान के जगदीश ने ‘जय जगत’ गीत प्रस्तुत किया। विद्यालय प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उसे सर्वोदय डायरी 2027 और महात्मा गांधी की आत्मकथा भेंट की गई।
सुबह 8:45 बजे पदयात्रा नारों और गीतों के साथ आगे बढ़ी। कलकत्ता से आए बिप्लब नायक पूरे रास्ते लोगों से संवाद करते हुए यात्रा का संदेश साझा करते रहे।
बड़ा चौ माथा चौक पर नुक्कड़ सभा, शांति और एकता की अपील
शाम को बड़ा चौ माथा चौक पर नुक्कड़ सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जुटे। पदयात्रियों ने लोगों के बीच शांति, सद्भाव, प्रेम और अहिंसा का संदेश रखा।
कलकत्ता से पदयात्रा में शामिल बिप्लब नायक ने कहा कि पदयात्री अपनी मांगों और निवेदनों के साथ प्रेम, शांति और अहिंसा का संदेश लेकर निकले हैं। उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन पहुंचकर पदयात्री राखीबंधन उत्सव मनाएंगे।
उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर की उस ऐतिहासिक पहल का उल्लेख किया, जिसके तहत 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान राखीबंधन के माध्यम से प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश दिया गया था। उन्होंने कहा कि पदयात्रा इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बिना किसी दलगत भेदभाव के हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने और अहिंसा के रास्ते समाधान खोजने की अपील कर रही है।
हरियाणा से आए गांधीवादी सतीश मराठा ने कहा कि सर्व सेवा संघ की यह पदयात्रा महात्मा गांधी, विनोबा भावे और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रेरित है।
उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर संविधान, लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे युवाओं का उल्लेख करते हुए उनके साथ एकजुटता व्यक्त करने की अपील की। उन्होंने वहां प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस की कार्रवाई और बेटियों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर भी चिंता जताई।
सतीश मराठा ने लोगों से गांव-गांव और शहर-शहर जाकर जागरूकता फैलाने तथा संविधान, लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समय रहते जागरूक होना जरूरी है, ताकि भविष्य में पछताना न पड़े।
पदयात्रियों ने इस अवसर पर निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि निष्पक्ष चुनाव संसदीय लोकतंत्र की बुनियाद हैं। चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता लोकतंत्र को कमजोर कर सकती है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया का निष्पक्ष और पारदर्शी होना जरूरी है।
सभा के दौरान पंजाब से आए सुनील कुमार ने ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ गीत प्रस्तुत किया। मध्य प्रदेश के शहडोल से आए इस्तियाक ने ‘मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर ने बांट लिया भगवान को, धरती बांटी, सागर बांटा, मत बांटो इंसान को’ गीत के माध्यम से धार्मिक सद्भाव और मानवीय एकता का संदेश दिया।
बिल्वाग्राम पंचायत भवन में पदयात्रियों का स्वागत
शाम को पदयात्रा अपने अंतिम पड़ाव बिलोग्राम पंचायत भवन पहुंची, जहां पंचायत प्रधान राय चौधरी ने यात्रा दल का स्वागत किया।
पंचायत प्रधान ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इस तरह की पदयात्रा का आयोजन सराहनीय और प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के लिए उन्होंने तत्काल सहमति दी थी और अपनी ओर से हर संभव सहयोग करने का प्रयास किया।
पदयात्रा में शामिल साथी – ग्यारहवें दिन की पदयात्रा में निधि, अलीभा, अनोखेलाल, रबिया बेगम, देबाशीष, बिस्वजीत गोराई, विष्णु, अनूप कुमार, आसमा आदिवासी, कीर्ति, चंदन पाल, बिरेन डेका, सतीश मराठा, जितेन नंदी, श्रीनिवासन, विक्रम पाटिल, बिप्लब नायक, अरविंद अंजुम, इस्तियाक, उमेश तुरी, सुशांत मोहंती, संभव, किरण वीर, सतरंजन पाल, शांतू सरदार, राज रानी खोसला, बसीर, सबीना, जगदीश कुमार और विकास कुमार सहित अन्य पदयात्री शामिल रहे।
जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती पर पदयात्रियों ने लिया लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा…
जंतर-मंतर पर लोकतंत्र की आवाज़ उठाने वालों के दमन और गिरफ्तारियों के खिलाफ पदयात्रियों ने…
गांधीजी की बुनियादी शिक्षा के आदर्शों पर चल रहे शिक्षा-निकेतन पहुंचा पदयात्रा दल “बच्चे गांधीजी…
प्रेम, शांति और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर मेमारी, पूर्व वर्धमान पहुंची ‘जहाँ पड़े कदम…
बुल्ले शाह के गीत से गूंजा पदयात्रा मार्ग, प्रेम और मानवता का संदेश 5 अक्टूबर,…
‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ 5 अक्टूबर, त्रिवेणी। गांधी जयंती…