जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती पर पदयात्रियों ने लिया लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा का संकल्प
“जनता के बीच जाओ और सच बताओ, यही जयप्रकाश नारायण का संदेश था” – चंदन पाल
बर्धमान, 11 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा अपने दसवें दिन बर्धमान शहर से आगे बढ़ते हुए तालिद पहुंची। सर्व सेवा संघ एवं अन्य लोकतांत्रिक संगठनों द्वारा आयोजित यह पदयात्रा प्रेम, शांति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है। 16 अक्टूबर को यात्रा शांतिनिकेतन पहुंचेगी।
देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 15 राज्यों के पदयात्री इस यात्रा में शामिल हैं। दसवें दिन की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना से हुई।
11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती के अवसर पर पदयात्रियों ने लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता तथा सामाजिक परिवर्तन के प्रति उनके योगदान को याद किया।
जयप्रकाश नारायण के विचार आज भी नागरिक स्वतंत्रता के लिए प्रेरणा
सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ पटना में हुई अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने जयप्रकाश जी से पूछा कि “हमारे लिए आपका क्या संदेश है?” तो उन्होंने जवाब दिया, “जनता के बीच जाओ और सच बताओ।”
चंदन पाल ने कहा कि वर्तमान पदयात्रा इसी संदेश से प्रेरित है। जयप्रकाश नारायण के ‘पावर टू द पीपल’ यानी सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति जनता के हाथों में होने के विचार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरे समाज को आगे आना होगा। उन्होंने संपूर्ण क्रांति आंदोलन और जयप्रकाश जी के सर्वोदय से जुड़ाव को याद करते हुए उनके विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया।
सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल के विरोध के साथ-साथ बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भी दुनिया भर में जनसमर्थन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विभिन्न देशों के नेताओं से संवाद के माध्यम से उन्होंने एक जनदूत के रूप में अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण के जीवन और विचारों के विभिन्न पहलुओं पर आलोचनात्मक चर्चा संभव है, लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रेरणा देती है। उन्होंने जयप्रकाश जी के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता से सत्ता, संपत्ति और यहां तक कि राष्ट्र के सम्मान के नाम पर भी समझौता नहीं करने की बात कही गई है। उनके अनुसार, आज लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के संदर्भ में यह विचार विशेष महत्व रखता है।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के शहडोल से पदयात्रा में शामिल इस्तियाक भाई ने जयप्रकाश नारायण को समर्पित गीत ‘जयप्रकाश का बिगुल बजा तो जाग उठी तरुणाई है’ प्रस्तुत किया। इसके बाद सुबह 9 बजे पदयात्रा नारों और गीतों के साथ आगे बढ़ी। कलकत्ता से आए बिप्लब नायक पूरे रास्ते लोगों से संवाद करते हुए पदयात्रा के उद्देश्य और गांधीजी के विचारों का संदेश साझा करते रहे।
पदयात्रा के लिए गरीब महिला चम्पा हाजरा ने किया सहयोग, प्रेम और सद्भाव का दिया संदेश
सुबह करीब 11 बजे चाय के लिए यात्रा एक मंदिर परिसर में रुकी। यहां तिलक लगाकर दक्षिणा प्राप्त करने वाली स्थानीय महिला चम्पा हाजरा को जब पदयात्रा के उद्देश्य के बारे में पता चला, तो उन्होंने आत्मीयता के साथ 20 रुपये का योगदान दिया। इस दौरान उन्होंने प्रेम और आपसी सद्भाव पर एक मार्मिक बात कही, “जब हम किसी से प्यार करेंगे, तभी दूसरा व्यक्ति भी हमसे प्यार करेगा।” उनका यह सहज संदेश पदयात्रा के प्रेम और मानवता के विचारों से जुड़ गया।
ईस्ट-वेस्ट मॉडल स्कूल में हुआ स्वागत
दोपहर 12 बजे पदयात्रा अपने अंतिम पड़ाव ईस्ट-वेस्ट मॉडल स्कूल पहुंची। यहां विद्यालय की ओर से यात्रा दल का स्वागत किया गया तथा पदयात्रियों के लिए भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई।
पदयात्रा में शामिल साथी
आज की पदयात्रा में निधि, अलीभा, अनोखेलाल, रबिया बेगम, चितरंजन प्रमाणिक, सदानंद मंडल, प्रदीप सरदार, देबाशीष, बिस्वजीत गोराई, विष्णु, अनूप कुमार, आसमा आदिवासी, कीर्ति, चंदन पाल, बिरेन डेका, सतीश मराठा, जितेन नंदी, श्रीनिवासन, विक्रम पाटिल, बिप्लब नायक, अरविंद अंजुम, इस्तियाक, उमेश तुरी, सुशांत मोहंती, संभव, किरण वीर, देवअर्घ, रिंपा, अभिक, सौप्तिक, समीर करमाकर, पंकज , अनिरुद्ध, बिक्रम, मधुमिता, सतरंजन पाल, शांतू सरदार, सोमेंद्र, चंदन साहा , आयशा खातून, बसीर, जगदीश कुमार और विकास कुमार सहित अन्य पदयात्री शामिल रहे।
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