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हरियाणा की धरती पर पहुँची ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा – 51वां दिन

21 नवम्बर 2025
होडल, हरियाणा

“स्वतंत्रता हमें 1947 में मिली थी, लेकिन हम स्वराज के लिए अभी भी लड़ रहे हैं।” -चिंतामणि सहा

2 अक्टूबर को राजघाट, बनारस से संविधान, लोकतंत्र, सद्भावना और बंधुत्व का संदेश लेकर आरम्भ हुई ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा अपने 51 वे दिन डॉ. शेख गेस्ट हाउस, कोसी कला से निकलने से पहले सोफेन कुरैशी, जहीर पुनहांनियाँ और मथुरा के पूर्व विधायक प्रदीप माथुर शामिल रहे। नंदलाल मास्टर की टीम ने गीत प्रस्तुत किया और नारे लगाए। सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने यात्रा के उद्देश्य को बताते हुए कहा कि यह यात्रा संविधान, लोकतंत्र, सद्भावना और विरासत को बचाने के लिए है। हम समाज और देश में शांतिपूर्ण विकास चाहते हैं।

सोफेन कुरैशी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज की सरकार मजहब के नाम पर लोगों को बांटती है और देश में नफरत फैलाने वाले लोगों को समर्थन देती है। सरकार ने वादे तो बहुत किए लेकिन न तो रोजगार मिला और न ही अच्छी शिक्षा व्यवस्था। आपकी यात्रा जनता के मुद्दों को लेकर निकली है और यह केवल गांधी जनों की यात्रा नहीं, बल्कि जनता की यात्रा है। इसलिए मैं इसका समर्थन करता हूं और इसके सफल होने की कामना करता हूं। भारत विभिन्नताओं का देश है, इसे किसी एक धर्म-राष्ट्र में नहीं बदला जा सकता।

इसके बाद सभी क्षेत्रीय आयोजकों को गांधी की आत्मकथा सत्य के साथ मेरे प्रयोग और गांधी साहित्य भेंट किया गया। सर्व सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंदन पाल ने धन्यवाद देते हुए क्षेत्रीय लोगों से कहा कि एक कदम गांधी के साथ पदयात्रा में जुड़िए और दिल्ली आने की अपील की।

आगे चलकर पदयात्रा होडल पहुंची, जहां स्वागत करने के लिए चौधरी होशियार सिंह सहरावत, नीरज शर्मा और सौरभ त्यागी उपस्थित थे।

सौरभ त्यागी ने कहा कि आप लोगों को देखकर और आपके साथ चलकर ऐसा लगा जैसे मैं अपने ही कुनबे में आ गया हूं। छात्र जीवन से ही मैं गांधी जी के विचारों से प्रेरित रहा हूं और अन्ना आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़ा रहा हूं। नमक सत्याग्रह को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मोतीलाल नेहरू ने गांधी जी को पत्र लिखा था और उसके उत्तर में गांधी जी ने कहा था- “करके देखो।” यही इस यात्रा से मेरी सीख है।

झारखंड से जुड़े साथी चिंतामणि सहा ने कहा कि स्वतंत्रता हमें 1947 में मिली थी, लेकिन हम स्वराज के लिए अभी भी लड़ रहे हैं। गांधी जी का सपना था कि स्वतंत्रता को स्वराज तक पहुंचाया जाए। हमें हर बार पश्चिम की नकल नहीं करनी चाहिए क्योंकि पश्चिम की व्यवस्थाएं शोषण को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी आधारित संसदीय लोकतंत्र से देश चल तो सकता है, लेकिन हर व्यक्ति को मूलभूत सुविधाएं दिलाना इसके बस की बात नहीं।

इसके बाद यात्रा अंबेडकर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, होडल, पलवल ज़िला , हरियाणा पहुंची, जो आज का रात्रि विश्राम स्थल है।

यात्रा के प्रमुख प्रतिभागी:

चंदन पाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्व सेवा संघ), रामधीरज, नंदलाल मास्टर (उप्र), अरविंद अंजुम (झारखंड), भूपेश भूषण (मप्र), सोमनाथ रोड़े (महाराष्ट्र), सतीश मराठा (हरियाणा), आसमा आदिवासी (मप्र), श्यामधर तिवारी, जोखन यादव, विद्याधर मास्टर, प्रवीण वर्मा, विवेक मिश्रा, नीरज राय, प्रियेश, सुनील मास्टर, आशा राय, अनीता पटेल, सीमा, बेबी, कौशल, गणेश आज़ाद (राष्ट्रीय अध्यक्ष, लोकसमिति), आशा रानी, मैनब (उप्र), जगदीश कुमार (राजस्थान), विकास, अंकित मिश्रा (सचिव, सर्व सेवा संघ मप्र), मानिकचंद साहनी, डॉ. विष्णु कुमार (बिहार), सरिता बहन, सिस्टर फ्लोरीन, अलीभा, अंतर्यामी बराल, सौरभ, निधि, बृजेश, टैन, सचिन, आंचल, संध्या, श्रीनिवासन, विष्णु कुमार, आसमा आदिवासी, संजना, विवेक यादव, नीलम, सुनील मास्टर, रेवा, बजरंग भाई, ऋषभ, शिवधर, चिंतामणि सहा, डॉ. बी. आर. पाटील, बीरेंद्र, अनु, रेवा, ज़ुहैब, अमित, शुभाशीष तिवारी, विकास मिश्रा (गांधी आश्रम, छतरपुर) आदि।

लगातार 70 से अधिक पदयात्री यात्रा में जुड़कर चल रहे हैं।

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