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गांधी जयंती पर बेलेघाटा से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के’

गांधी जयंती पर बेलेघाटा से शुरू हुई ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा, 15 राज्यों से शामिल हुए पदयात्री

कोलकाता, 2 अक्टूबर 2026: गांधी जयंती के अवसर पर आज कोलकाता के बेलेघाटा स्थित गांधी भवन (पूर्व में हैदरी मंज़िल) से ‘जहाँ पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा की शुरुआत हुई। प्रेम, शांति और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर निकली यह पदयात्रा 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन पहुँचेगी। आज की यात्रा में बंगाल के नागरिक समाज के बड़ी संख्या में लोगों के साथ करीब 15 राज्यों से आए पदयात्रियों ने हिस्सा लिया।

सुबह 9 बजे गांधी भवन में पदयात्री एकत्र हुए, जहाँ सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने ऐतिहासिक हैदरी मंज़िल का उल्लेख करते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को जब देश के कई हिस्सों में स्वतंत्रता का उत्सव मनाया जा रहा था, तब महात्मा गांधी दिल्ली जाने के बजाय सांप्रदायिक हिंसा को शांत करने के प्रयास में हैदरी मंज़िल में रह रहे थे। गांधीजी ने इसी स्थान से शांति, अहिंसा और आपसी सद्भाव का संदेश दिया तथा लोगों को हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरित किया।

पापड़ी सरकार ने गांधीजी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी के दर्शन के तीन मूल स्तंभ-शांति, सच्चाई और सादगी आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने पदयात्रियों से आह्वान किया कि वे अपनी यात्रा में शांति की तलाश करें और जहाँ भी जाएँ, गांधीजी की सादगी, मानवीयता और सद्भाव का संदेश साझा करें।

गांधी भवन में इस अवसर पर ‘सर्वोदय डायरी 2027’ का लोकार्पण भी किया गया। इसके बाद पदयात्रियों ने गांधी भवन संग्रहालय का भ्रमण किया, जहाँ गांधीजी के जीवन, हैदरी मंज़िल में उनके प्रवास से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरों और विभिन्न ऐतिहासिक वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है।

इसके बाद गांधी भवन से पदयात्रा की औपचारिक शुरुआत हुई। पदयात्री जोशीले गीतों और नारों के साथ आगे बढ़े और यात्रा का पहला प्रमुख पड़ाव रासमठ रहा।

बेलेघाटा की ऐतिहासिक विरासत और गांधीजी का शांति संदेश

प्रोफेसर काजल मुखर्जी ने बेलेघाटा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के दौर में गांधीजी ने हैदरी मंज़िल को सांप्रदायिक शांति के अपने प्रयासों का केंद्र बनाया था। इसी क्रम में बेलेघाटा क्षेत्र में गांधीजी की एक विशाल जनसभा का भी उल्लेख मिलता है, जिसमें लगभग 20,000 से 30,000 लोगों के शामिल होने की बात कही जाती है। गांधीजी ने लोगों से हिंसा का रास्ता छोड़कर अहिंसा, शांति और आपसी सद्भाव का मार्ग अपनाने का आह्वान किया था।

उन्होंने यह भी बताया कि यह जगह प्रसिद्ध विद्वान और इतिहासकार राजेंद्र लाल मित्र के ऐतिहासिक निवास से भी जुड़ा रहा है।

इसी अवसर पर चंपारण में गांधीजी के अनुभवों पर आधारित जितेन नंदी द्वारा लिखी गई कृति का लोकार्पण भी किया गया।

गीतों, नारों और संवाद के साथ आगे बढ़ी यात्रा

इसके बाद पदयात्रा आगे बढ़ी। चिलचिलाती धूप के बावजूद पदयात्रियों का उत्साह बना रहा। यात्रा के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर की विभिन्न रचनाओं पर आधारित गीत गाए गए और पदयात्रा के उद्देश्य तथा गांधीजी के विचारों को पर्चा के माध्यम से लोगों के बीच साझा किया गया।

पदयात्री आगे बढ़ते हुए जे.सी. बोस इंस्टीट्यूट, राजा बाज़ार पहुँचे। यहाँ पदयात्रियों ने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस के ऐतिहासिक आवास को भी देखा। इस दौरान देबाशीष ने जगदीश चंद्र बोस के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े योगदान का उल्लेख किया तथा रवींद्रनाथ टैगोर के साथ उनके संबंधों और वैचारिक संवाद की चर्चा की।

लगातार बढ़ती गर्मी और लंबी दूरी के बावजूद पदयात्रियों ने पूरे उत्साह के साथ यात्रा जारी रखी। इसके बाद श्यामबाज़ार में पदयात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था हुई और वहाँ से यात्रा आगे बढ़ी।

करीब 17 किलोमीटर की यात्रा में लगभग पूरे दिन चलने के बाद शाम 5 बजे डनलप मोड़ पर पदयात्रा के पहले दिन का समापन हुआ।

पहले दिन शामिल रहे पदयात्री

आज की पदयात्रा में इप्टा के अध्यक्ष प्रसन्ना , आइकैन के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद मूर्ति, राजश्री, निधि, सिस्टर फ्लोरिना मोरी, आयशा, आसमा आदिवासी, रीपांजल लकड़ा, कुंती बोइपाई, निधि मुंडा, अजय बेसरा, किरण, सिद्धारहा, शिव शंकर दास, मोहित, सोमित आचार्य, बशीर, प् चंदन पाल, अशोक भारत, बिरेन डेका, सतीश मराठा, बिपिन, जितेन नंदी, श्रीनिवासन, एम.एच. पाटिल, विक्रम पाटिल, उमेश टुरी, बिप्लब नायक, अरविंद अंजुम, अमृत बाउरी, सोहन, अभिजीत, सतिया, अज़हर, इस्ताक, रामाकांत, आयुष, सुशांत मोहंती, किरण वीर,आयशा खातून, बशीर, जगदीश कुमार, विकास कुमार सहित अन्य पदयात्री शामिल रहे।

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