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सत्ता में बैठे लोग गांधी का नाम तो लेते हैं, लेकिन काम नहीं करते – पटना से चम्पारण यात्रा का 5वां दिन

चंपारण (पूर्वी) में यात्रा का प्रवेश

प्रेस विज्ञप्ति – 14 अप्रैल 2026
मेहसी, चंपारण

जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ
पटना से चंपारण यात्रा
10 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026

आजादी के आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा तथा उन्हें मजबूत करने के उद्देश्य से “जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ” पटना से चंपारण तक यात्रा निकाली गई है। आज पांचवें दिन सुबह 8 बजे यात्रा मुजफ्फरपुर के मोतीपुर स्थित एक कोचिंग संस्थान पहुंची, जहां बड़ी संख्या में छात्र और फैकल्टी सदस्य मौजूद थे। यात्री दल का जोरदार स्वागत किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में उमेश तूरी ने नौजवानों को समर्पित गीत “नौजवान आओ रे” प्रस्तुत किया। यात्रा के आयोजक अशोक भारत ने विभिन्न राज्यों से यात्रा में शामिल साथियों का परिचय करवाया।

सर्वोदय मंडल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं यात्री दल के सदस्य रामधीरज ने अंबेडकर जयंती के अवसर पर भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि प्रारूपण समिति के अध्यक्ष के रूप में संविधान निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संविधान ने जनता को व्यापक अधिकार दिए हैं। उन्होंने समाज में फैले भेदभाव के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। रामधीरज ने आगे कहा कि सभी मनुष्य समान हैं, इसलिए जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए तथा लड़कियों को भी समान अवसर मिलने चाहिए। साथ ही उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए युवाओं से ज्ञान और देश सेवा के उद्देश्य से पढ़ाई कर समाज और देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

इसके बाद गांधी चौक तक पदयात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र ऊर्जा के साथ नारे लगाते हुए आगे बढ़े। गांधी चौक पर स्थित गांधी मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया। मोतीपुर में कार्यक्रम के आयोजन में संदीप कुमार, दिलीप कुमार, कुणाल कुमार, पूनम कुमारी, अश्विनी कुमार, एमडी शाकिब, शंभू मोहन प्रसाद और संजय निषाद की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम में सोनू सरकार और सुनील भी उपस्थित थे ।

इसके बाद यात्रा पूर्वी चंपारण के मेहसी पहुंची। यात्री ऐतिहासिक शहीद राम अवतार द्वार के पास पहुंचे। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता हामिद ने बताया कि शहीद राम अवतार प्रसाद साह चंपारण क्षेत्र के एक वीर स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। वर्ष 1942 में गांधी द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान पर राम अवतार साह ने मेहसी और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को संगठित किया और ब्रिटिश शासन के विरोध में आंदोलन का नेतृत्व किया। 24 अगस्त 1942 को मेहसी रेलवे स्टेशन के पास अंग्रेजों ने आंदोलनकारियों पर गोली चलाई, जिसमें राम अवतार साह को गोली लगी और वे शहीद हो गए।

यात्री दल ऐतिहासिक मेहसी रेलवे स्टेशन के पास भी पहुंचा। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि जिस स्थान पर उन्हें गोली लगी थी, उनकी स्मृति में बनाए गए चबूतरे को रेलवे ने हटा दिया है। यात्री दल ने वहां एक सभा करते हुए कहा कि शहीदों के स्मारक या चबूतरे को हटाना देश और शहीदों का अपमान है। सभा में रेलवे प्रशासन से मांग की गई कि शहीद की मूर्ति को तुरंत फिर से स्थापित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद रख सकें। वर्तमान सरकार और प्रशासन शहीदों की उपेक्षा कर देश के गौरवशाली इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से पटना से चंपारण तक यात्रा निकाली जा रही है, जिससे लोगों को आजादी के संघर्ष की याद दिलाई जा सके।

यात्रा दल ने सीप से बनने वाले लघु बटन उद्योग को भी देखा। एक समय यहां बड़ी संख्या में लघु उद्योग थे, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलता था, लेकिन सरकार के संरक्षण और प्रोत्साहन के अभाव में यह उद्योग दम तोड़ रहा है। इसी क्रम में यात्रियों ने अब बंद पड़ी ऐतिहासिक तिरहुत मून बटन फैक्ट्री को भी देखा।

मेहसी में कार्यक्रम के आयोजन में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अमर और उनकी टीम का बड़ा योगदान रहा।

इसके बाद यात्रा पूर्वी चंपारण के पकड़ीदयाल पहुंची। स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत के बाद ग्रामीण क्षेत्र में पदयात्रा की गई। राजकीय प्राथमिक विद्यालय जगतिया, पकड़ीदयाल में एक सभा का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। इस दौरान यात्रा के आयोजक अशोक भारत ने कहा कि आज हम चंपारण की उस ऐतिहासिक भूमि पर खड़े हैं, जहां से भारत की आजादी की नींव रखी गई थी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की विचारधारा आज भी लोगों को प्रेरित करती है और वर्तमान समय में विश्व शांति के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। गांधीजी के नेतृत्व में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के पतन की शुरुआत हुई थी। उन्होंने वर्तमान वैश्विक स्थिति में अमेरिकी साम्राज्यवाद की आलोचना करते हुए कहा कि गांधीजी ने ऐसे संप्रभु भारत की कल्पना की थी, जिसे किसी भी निर्णय के लिए किसी अन्य देश की अनुमति की आवश्यकता न हो।

सभा की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मुखिया विजय ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग गांधी का नाम तो लेते हैं, लेकिन काम नहीं करते। उन्होंने कहा कि उनके पिता और दादा दोनों स्वतंत्रता सेनानी थे और जेल भी गए थे। आज तीसरे विश्व युद्ध की आहट के दौर में गांधी का विचार ही विश्व शांति के लिए प्रेरणा दे सकता है।

पकड़ीदयाल की सभा का संचालन मुकेश कुमार ने किया। इस दौरान प्रमोद कुशवाहा, अशोक कुमार सिंह, नगर अध्यक्ष शंभू पासवान आदि भी शामिल रहे।

आज यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर सभी प्रमुख स्थानीय आयोजकों को सर्वोदय जगत पत्रिका का यात्रा विशेषांक, ‘गांधी दर्शन के तात्विक आधार’ पुस्तक, सर्वोदय डायरी और कस्तूरबा कैलेंडर स्मृति-स्वरूप भेंट किए गए।

यात्रा दल में शामिल साथी

सर्व सेवा संघ के सचिव अरविंद अंजुम, उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज, सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरिन, यात्रा संयोजक अशोक भारत, बिहार प्रदेश लोक समिति के शिवजी सिंह, हिमालय विजेता कीर्ति, वैज्ञानिक चेतना निर्माण कार्यकर्ता विकास कुमार, युवा सामाजिक कार्यकर्ता उमेश तूरी, मयूर और पर्यावरण कार्यकर्ता अनूप कुमार।

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