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मथुरा बार्डर सील होने के बावजूद पदयात्रा मथुरा की तरफ आगे बढ़ी – पदयात्रा का 45वां दिन

आगरा, 15 नवम्बर 2025

आज यात्रा का 45वां दिन है। मथुरा प्रशासन द्वारा पदयात्रा को मथुरा बार्डर में प्रवेश करने से रोकने के निर्देश के बावजूद आज सुबह आगरा गुरु के ताल गुरुद्वारा से यात्रा 10:00 बजे मथुरा के लिए रवाना हुई।


यात्रा प्रस्थान करने से पहले सुबह 8 बजे आचार्य विनोबा भावे की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पूरे कार्य को– खासतौर पर उनके नेतृत्व में भूदान आंदोलन एवं ग्रामदान के कार्यों से पदयात्री अवगत हुए। आज बिरसा मुंडा की भी जयंती थी। इस अवसर पर उनके द्वारा चलाए गए स्वशासन एवं सामुदायिक अधिकारों को लेकर चलाए गए उलगुलान के विषय में भी पदयात्री परिचित हुए। उसके बाद गुरुद्वारा के प्रमुख बाबा संत प्रीतम सिंह जी ने गुरुद्वारा के इतिहास और कार्यों के बारे में बताया. संत प्रीतम दास जी ने कहा कि यह गुरुद्वारा उन गुरु के नाम है जिन्होंने अपनी जान स्वाभिमान और सम्मान के लिए कुर्बान कर दी। गुरु तेग बहादुर सिंह जी, जो हमारे नवें गुरु हैं। यह वही स्थान है जहां से गुरु तेग बहादुर जी को औरंगजेब की सेना ने गिरफ्तार किया था। अपनी बात रखते हुए बाबा प्रीतम सिंह ने कहा कि हम मेहनतकश लोग हैँ और गुरु साहिब नानक देव जी के रास्ते पर चलने वाले हैं, जिन्होंने सत्य का रास्ता दिखाया।


मैं यहां आए हुए लोगों को और इस पदयात्रा में चलने वाले लोगों को यही कहूंगा कि वह गुरुओं का अनुसरण करें और सच का साथ दें।
सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदनपाल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हम धन्यवाद करते हैं इस गुरुद्वारा परिसर का जिसने हमारे तीन दिन रहने की व्यवस्था की। हम सभी आपके द्वारा कहे गए बातों को जरूर ध्यान में रखेंगे । हम आपके गुरुद्वारे में रहकर सेवा और सफाई का भाव ग्रहण किए, जो हमें पूरी ज़िंदगी याद रहेगा। इसके बाद डा सत्येंद्र यादव, अवधेश यादव, नेत्रपाल चौहान, सुनीता यादव, पूर्व ब्लाक प्रमुख, दिनेश चंद्र गोयल, अनिल प्रधान, चंद्रमोहन पाराशर और आयोजन समिति ने यात्रियों को शाल देकर सम्मानित किया।
पदयात्रा टीम द्वारा आयोजकों को गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ एवं ‘आरोपो की आंधी में अडिग गांधी’ भेंट कर उन्हें सम्मानित किया गया। उसके बाद पदयात्रा नारों और गीतों के साथ अरतौनी पहुँची। अरतौनी के आगे सूरदास के जन्म स्थान ऋणकता रूनकता पर स्थानीय साथी ओमवीर यादव ने सूरदास और उनके बारे में बताया।


पदयात्रा के संयोजक अरविंद अंजुम ने भारत के संविधान की खूबसूरती को बताते हुए कहा कि यह संविधान हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, विचार और दर्शन का परिणाम है। यह हमारी विरासत को रेखांकित करता है कि कैसे भिन्न जाति और धर्म के लोग भारत में एक साथ इस संविधान की वजह से ही समानता के साथ जीते हैं। लेकिन यह सरकार लगातार संविधान को खत्म करने का प्रयास कर रही है। इस सरकार से लोकतंत्र को खतरा है। यह पदयात्रा संवैधानिक मूल्यों को बचाने एवं सत्य, अहिंसा, सद्भाव को जन जन तक पहुँचाने और लोकतंत्र की रक्षा के उद्देश्य को लेकर निकली है।

कल यात्रा मथुरा जिले में प्रवेश करेगी.

यात्रा में शामिल प्रमुख प्रतिभागी:
चंदन पाल, रामधीरज, अरविंद अंजुम, भूपेश भूषण, सोमनाथ रोड़े, सतीश मराठा, आसमा, विद्याधर मास्टर, श्यामधर तिवारी, जगदीश कुमार, विकास, मानिकचंद, जोखन यादव, सरिता बहन, सिस्टर फ्लोरीन, अलीभा, अंतर्यामी बराल, सौरभ, सूर्योगी, निधि, विवेक मिश्र, बृजेश, टैन, सचिन, दीक्षा, प्रवीण, ज्योति, सपना, पूजा, प्रियंका, नेहा, आरती, मुस्तफा, पूनम, साधना, रश्मिन भाई, अनुप्रिया, नीता, पूजा, आंचल, हेमलता, संध्या, श्रीनिवासन, सौरभ भाई, मोहन भाई , सुरेश भाई , विष्णु कुमार, आसमा, संजना, नीरज , प्रियेश, विवेक यादव।

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