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भवनों को गिराने से मोदी सरकार को क्या मिला? – सत्याग्रह का 92वां दिन

आज सत्याग्रह के 92 वें दिन उपवास पर बिहार के जमुई जिले के रहनेवाले महेंद्र कुमार बैठे हैं। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के निवासी जोखन सिंह यादव आज भी उपवास पर हैं।

उपवासकर्ता महेंद्र भाई; जिनका व्रत ही सेवा है

आज के उपवास पर बैठे महेंद्र भाई पिछले 6 दशक से सर्व सेवा संघ और सर्वोदय के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। पहले ये सर्व सेवा संघ के श्रम भारती खादी ग्राम, मुंगेर (जमुई) बिहार में कार्यकर्ता थे। वे
श्रम भारती- खादी ग्राम विद्यालय के विद्यार्थी थे। वहीं से उनके दिलों- दिमाग में गांधी विचार के प्रति अनुराग-लगाव पैदा हो गया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं संस्था के काम में मदद करने में लग गए।
1974 के जेपी आंदोलन में सक्रियता से लग गए और सत्याग्रहियों और अतिथियों की व्यवस्था करने लगे। आपातकाल के बाद 1977 में आचार्य राममूर्ति के साथ सर्व सेवा संघ, वाराणसी आ गए। तब से यहीं काशी में रम गए। आज 65 साल की अवस्था में भी सर्व सेवा संघ प्रकाशन के साथ पूरी सक्रियता से लगे हुए हैं। उन्हें लोगों की सेवा और भोजन बनाने की कला में महारत हासिल है।

आखिर इन भवनों को गिराने से मोदी सरकार को क्या मिला?
वो पूछते हैं कि गांधी, विनोबा, जयप्रकाश की क्या गलती है?

सर्व सेवा संघ परिसर, राजघाट में वे पिछले 5 दशक से रह रहे थे। पर जब उन्हें पता चला कि राजघाट परिसर को ध्वस्त कर दिया है तो हतप्रभ रह गए। उपवास पे बैठे हुए नम आंखों से कहते हैं कि आखिर इन भवनों को गिराने से मोदी सरकार को क्या मिला?
वो पूछते हैं कि गांधी, विनोबा, जयप्रकाश की क्या गलती है? मैं हमेशा देखता हूं कि मोदी जी जहां जाते हैं वहां गांधी जी को नमन करते हैं और जयप्रकाश जी के सहारे तो इन लोगो को सत्ता में भागीदारी मिली। विनोबा जी ने लाखों एकड़ जमीन मांग कर गरीबों और भूमिहीनों को दिया। भूदान, ग्राम स्वराज के प्रचार का यह एक जीवंत केंद्र था।इन्होंने विनोबा-जेपी के इस आश्रम को क्यों गिरा दिया?
मैं मोदी जी से निवेदन करता हूं कि वो इस ऐतिहासिक जनहितकारी आश्रम को फिर से आबाद करें।

वाराणसी सत्याग्रह के पक्ष में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इलाहाबाद में इसके समर्थन में रोज सत्याग्रह किया जाता है, जिसका 90 दिन पूरा होने पर 15 दिसंबर को समापन होगा। इसी प्रकार विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी की कार्यसमिति की बैठक के दौरान भीमनगर, जमशेदपुर में दीप जलाकर परिसर वापसी की मांग का समर्थन किया गया। साथ ही उमर खालिद सहित सभी राजबंदियों को रिहा करने तथा ओल्ट न्यूज के मो जुबेर व मानवाधिकार कार्यकर्ता नदीम खान को फंसाने की साजिश का विरोध किया गया।

गांधी विरासत को बचाने के लिए प्रशासनिक दबाव के चलते सर्व सेवा संघ परिसर के सामने से स्थानांतरित होकर शास्त्री घाट में चल रहे सत्याग्रह का आज 92 वां दिन है। स्वतंत्रता आंदोलन में विकसित हुए लोकतांत्रिक भारत की विरासत और शासन की मार्गदर्शिका- संविधान को बचाने के लिए 11 सितंबर (विनोबा जयंती) से सर्व सेवा संघ के आह्वान पर “न्याय के दीप जलाएं -100 दिनी सत्याग्रह जारी है जो 19 दिसंबर 2024 को संपन्न होगा। सत्याग्रह आज सर्व धर्म प्रार्थना एवं गीता पाठ के साथ अपने 92 वें पायदान पर पहुंच गया है।

आज सत्याग्रह में उपवासकर्ता महेंद्र कुमार एवं जोखन सिंह यादव के अलावा उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष राम धीरज, वरिष्ठ गांधीवादी विद्याधर, जौनपुर से सिराज भाई, लोक समिति के प्रमुख नंदलाल मास्टर, प्रकाशन समिति के संयोजक अशोक भारत, समाज सेविका जागृति राही, सिस्टर फ्लोरीन, सिक्किम की हेलेना लेपहा, आफरीन हाशमी, आम आदमी पार्टी के विनोद जायसवाल, लोक लोक समिति की रानी पटेल, पूजा यादव, पुष्पा पटेल, प्रीति गौड, सावित्री राय, मनीषा राय, मधुबाला, निहाल गांधी, सोती भाई, शुभम मोदनवाल, अभिलाष मुखर्जी आदि शामिल थे।

जागृति राही, नंदलाल मास्टर
सत्याग्रह प्रभारी

राम धीरज, सर्व सेवा संघ

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