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विधायक सुमित वानखेडे के बयान पर गांधी संस्थाओं का तीव्र विरोध : “बयान वापस लें या प्रमाण प्रस्तुत करें”

वर्धा जिले की प्रमुख गांधीवादी संस्थाओं ने भारतीय जनता पार्टी के आर्वी विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुमित वानखेडे के बयान का तीव्र विरोध किया है। वर्धा की गांधी संस्थाओं में माओवादी विचारधारा से जुड़े लोगों का आना-जाना है, ऐसा गंभीर आरोप विधायक वानखेडे ने किया था। उनके इस बयान से गांधी विचारधारा पर काम करने वाले संस्थानों में आक्रोश की लहर फैल गई है।

इस पृष्ठभूमि में गांधी विचार के कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को आज दिनांक १६ जुलाई २०२५ को एक खुला पत्र भेजकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है और इस बयान की पृष्ठभूमि में कुछ ठोस प्रश्न उठाए हैं।

“गैर-जिम्मेदार और निराधार आरोप”
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में संस्थाओं ने उल्लेख किया है कि –
“माओवादी संबंधों के नाम पर गांधीवादी संस्थाओं पर संदेह करना केवल निराधार ही नहीं, बल्कि अपमानजनक भी है। ऐसे बयानों से सत्य के लिए, अहिंसात्मक मार्ग पर कार्यरत संस्थाओं की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।”

जनता में भ्रम और अविश्वास फैलाने वाला बयान
“यदि विधायक सुमित वानखेडे या राज्य सरकार के पास कोई ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें तुरंत जनता के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए,” ऐसी मांग पत्र में की गई है।
“अन्यथा उन्हें अपना बयान तत्काल वापस लेना चाहिए।”

गांधी विचारों की स्पष्ट भूमिका
गांधी संस्थाओं ने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है –
“हम कल भी तानाशाही के विरोध में खड़े थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। हम किसी भी प्रकार की हिंसक या उग्र विचारधारा से दूर हैं – चाहे वह वामपंथी हो या दक्षिणपंथी।”

सत्य की जांच के लिए सहयोग की तत्परता
संस्थाओं ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है – “किसी भी प्रकार की जांच में हम पूर्ण सहयोग करेंगे, क्योंकि हम सदैव अहिंसा, सत्य और जनकल्याण के मार्ग पर चलने वाले रहे हैं। हमारा अस्तित्व ही सत्ताधीशों को असहज करता हो, ऐसा संदेह इस आलोचना से उत्पन्न होता है।”

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख गांधी विचार संस्थाओं के प्रतिनिधि

  1. चंदन पाल – अध्यक्ष, सर्व सेवा संघ, सेवाग्राम
  2. आशा बोथरा – अध्यक्ष, सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान
  3. डॉ. प्रभाकर पुसदकर – मंत्री, नई तालीम समिति, सेवाग्राम
  4. डॉ. विभा गुप्ता – अध्यक्ष, मगन संग्रहालय, वर्धा
  5. डॉ. अविनाश काकडे – मंत्री, सर्व सेवा संघ, सेवाग्राम
  6. अनिल फरसोले – मंत्री, गांधी सेवा संघ, सेवाग्राम
  7. रमेश दाने – अध्यक्ष, प्रदेश सर्वोदय मंडल, महाराष्ट्र
  8. अतुल शर्मा – सदस्य, ग्राम सेवा मंडल, वर्धा
  9. सुदाम पवार – अध्यक्ष, किसान अधिकार अभियान, वर्धा
  10. डॉ. तारक काटे – अध्यक्ष, धरमित्र, गोपुरी वर्धा
  11. अशोक बंग – अध्यक्ष, चेतना विकास
  12. किरण जाजू – सहमंत्री, बजाज बालमंदिर, वर्धा

माननीय मुख्यमंत्रीजी,
महाराष्ट्र राज्य।

सप्रेम जय जगत!

भारतीय जनता पक्ष के आर्वी मतदार क्षेत्र के विधायक श्री सुमित वानखेडे जी ने कहा है कि वर्धा के गांधी संस्थाओं में माओवादियों का रिश्ता और आना-जाना है। आपके विधायक के बयान का अनुमोदन करते हुए अपने जाँच की बात भी की है।

आप दोनों का यह वक्तव्य सुनकर हमें आश्चर्य हुआ है। महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य का मुख्यमंत्री इतना गैरजिम्मेदार और आधारहीन वक्तव्य कैसे दे सकते है ? आपने ६२ संस्थाओं का उल्लेख भी किया है। यदि आप उन संस्थाओं का नाम देते तो आपके पद की गरिमा को शोभा देता और भ्रांति की स्थिति नहीं बनती। आप मुख्यमंत्री हैं, आपके पास पूरी जानकारी तो होगी ही। आपके इस भ्रामक बयान के कारण लोगों के मन में देशभर की गांधीवादी संस्थाओं के प्रति संदेह उत्पन्न हो सकता है।

गांधीजी ने हमें मानवीय मूल्यों के, न्याय के,अहिंसा के ,जवाबदेह शासन के और अंतिम आदमी के पक्ष में खड़ा रहना सीखाया है। यह हमने किया है और करते रहेंगे। हम तानाशाही के खिलाफ कल भी खड़े थे, आज भी खड़े हैं और भविष्य में भी खड़े रहेंगे। यह हमारा संकल्प और दायित्व दोनों है। रही बात ६२ संस्थाओं की। तो हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि उन संस्थाओं के नाम और उनके नक्सली कनेक्शन के बारे में जो भी जानकारी प्रशासन के पास है उसे सार्वजनिक करें। हम इस पत्र के माध्यम से आपको आश्वस्त करते हैं कि कभी भी गांधीवादी संस्थाओं का नक्सली कनेक्शन सिद्ध नहीं हो पाएगा। हम हिंसा और उग्र दुराग्रही विचारधारा के‌ विरोधी है, चाहे वह दक्षिणपंथी हो या वामपंथी।

हम माओवादी कनेक्शन से संबंधित किसी भी प्रकार की जांच के लिए तैयार हैं और वादा करते हैं कि हम उसमें पुरा सहयोग करेंगे। हम सत्य,अहिंसा और न्याय के पक्ष में आवाज उठाते रहे हैं। इसलिए सत्ता असहज हो जाती है।

अंत में हम आपको प्रार्थना करते हैं कि या तो आप जानकारी सार्वजनिक कर बयान को प्रमाणित कीजिए या अपना बयान वापस लेने की घोषणा किजिए।

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