05 नवम्बर 2025
जसवंत नगर, इटावा, उत्तर प्रदेश
गुरुनानक भारत के उदारवादी परम्परा के संत थे : अरविंद अंजुम
इटावा सामाजिक परिवर्तन की धरती हैं: चंदन पाल
आज ‘एक कदम गांधी के साथ पदयात्रा’ अपने 35वें दिन लॉर्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल, इटावा से सुबह 8 बजे प्रस्थान की। आगे कुछ दूरी पर प्रसिद्ध घोड़ा चाय की दुकान पर पदयात्रियों ने चाय पी। वहीं पर अन्य साथियों से पदयात्रा के उद्देश्य पर संवाद किया गया।
गुरुनानक जयंती के अवसर पर पदयात्रियों ने गुरुद्वारे में जाकर सर्वधर्म प्रार्थना के अंतर्गत गुरुवाणी का पाठ किया। जिस प्रकार गुरु ग्रंथ साहिब में उस समय की उदारवादी परंपरा के सूफी और संतों की वाणियों का संकलन किया गया है, उसी प्रकार भारतीय संविधान में भी दुनिया भर के राजनीतिक आदर्शों, सिद्धांतों, अनुभवों और विधानों का समावेश है। यही संविधान भारत के सामाजिक ताने–बाने को मजबूत करता है।
आगे बढ़ते हुए सिविल लाइन, इटावा में स्थित बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और नारे लगाए गए। इसके पश्चात नुमाइश मैदान, इटावा में स्थित वीरगति प्राप्त सैनिक स्मारक पर श्रद्धांजलि दी गई – यह स्मारक चीन और पाकिस्तान के आक्रमणों में राष्ट्र की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर सैनिकों की स्मृति में निर्मित है।
इसी मैदान में स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण किया गया। व्यवस्थापक एवं स्थानीय संयोजक कृपा राम राजपूत (सेवानिवृत्त फौजी) को सर्व सेवा संघ द्वारा गांधी की ‘आत्मकथा – सत्य के प्रयोग’, नई प्रकाशित पुस्तक ‘आरोपों की आंधी में अडिग गांधी’ और ‘सर्वोदय जगत’ पत्रिका भेंट की गई।
सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने पदयात्रा के उद्देश्य पर कहा कि इस यात्रा के चार प्रमुख मुद्दे हैं – संविधान, लोकतंत्र, सद्भावना और विरासत की हिफाज़त। समाज में मजबूती और जागरूकता लाने के उद्देश्य से यह यात्रा निकाली गई है। उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, परंतु आज अनेक निर्णय धर्म के आधार पर लिए जा रहे हैं। संविधान सभी आस्तिक, नास्तिक, धर्म मानने या न मानने वाले लोगों को समान दृष्टि से देखता है और समान अधिकार देता है। किंतु वर्तमान सरकार वोट की राजनीति के लिए धार्मिक आधार पर भेदभाव कर रही है और धार्मिक वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास कर रही है, जो भारतीय संविधान के लिए खतरनाक है।
पदयात्रियों ने दोपहर का विश्राम और भोजन विजडम एकेडमी, सराई, भोपट, इटावा में किया। यात्रा की ओर से स्थानीय संयोजक और व्यवस्थापक का धन्यवाद किया गया तथा उन्हें भी सर्व सेवा संघ की ओर से उपरोक्त साहित्य भेंट किया गया।
लल्लू दद्दा की जन्मभूमि चन्द्रहंशपुरा में गांधी विचारों और ग्राम स्वराज का संदेश लेकर पहुँची पदयात्रा”
चन्द्रहंशपुरा, लल्लू दद्दा की जन्मभूमि में यात्रा के दौरान बताया गया कि लल्लू दद्दा चंबल क्षेत्र में शांति स्थापना और बागियों के समर्पण के सूत्रधार रहे हैं। उन्होंने इटावा में गांधी विचार और सर्वोदय का कार्य आगे बढ़ाया। यहां एक ज्ञान केंद्र और हैप्पीनेस सेंटर की स्थापना की गई है, जहां युवाओं को गांधी विचार और साहित्य से परिचित कराया जाएगा।
मीनाक्षी सिंह ने कहा कि “हमारे पिता और दादा जी ने हमें गांधी के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इसी प्रेरणा से हम गांव में शिक्षा, विशेषकर किशोरी शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।”
इस अवसर पर शैलेंद्र सिंह राजावत, पहलवा सिंह, महेंद्र भाई, सतेंद्र सिंह, श्रीनारायण शर्मा आदि उपस्थित रहे।
यात्रा के संयोजक और सर्व सेवा संघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष राम धीरज ने कहा कि यह यात्रा शांति, सद्भाव, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। वर्तमान सरकार गांधी, जयप्रकाश, विनोबा और लोहिया के विचारों तथा संविधान पर लगातार हमला कर रही है। यह हमारी विरासत को कमजोर कर रही है। इसी विरासत को बचाने के लिए यह पदयात्रा राजघाट, बनारस से दिल्ली राजघाट तक निकाली जा रही है।
राम धीरज ने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा – “आप आत्मनिर्भर बनिए और गांधी के ग्राम स्वराज के सिद्धांत को अपनाइए ताकि आपका गांव आत्मनिर्भर बन सके।”इसके पश्चात वृक्षारोपण किया गया और यात्रा आगे बढ़ी।
रात्रि पड़ाव बचपन प्ले स्कूल, जसवंत नगर, इटावा में हुआ, जहां स्थानीय साथियों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। स्वागत समारोह में सर्व सेवा संघ युवा प्रकोष्ठ के संयोजक भूपेश भूषण ने कहा कि वर्तमान समय में जाति, धर्म, संप्रदाय, ऊंच-नीच और आर्थिक असमानता के आधार पर समाज को विभाजित किया जा रहा है। बड़ी-बड़ी कंपनियां आम जनता के हितों पर हावी हैं। इन्हीं प्रवृत्तियों का प्रतिकार करने हेतु हम सत्य और अहिंसा के पथ पर चल रहे हैं। इस संकल्प को हम 26 नवम्बर 2025 को दिल्ली में पूरा करेंगे।
पदयात्रा में शामिल प्रमुख प्रतिभागी:
चंदन पाल, अरविंद कुशवाहा, नंदलाल मास्टर, अरविंद अंजुम, सोमनाथ रोडे, सतीश मराठा, गौरांग महापात्रा, ध्रुव भाई, विद्याधर मास्टर, श्यामधर तिवारी, जगदीश कुमार, विकास, मानिकचंद, अनोखेलाल, जोखन यादव, सरिता बहन, सिस्टर फ्लोरीन, अलीभा, अंतर्यामी बराल, सौरभ, गौरव, निधि, प्रवीण, दीक्षा, बृजेश, टैन, सचिन, हेतवी, देवेंद्र भाई, विशाल जैन, अखिलेश यादव, भागीरथी, अमर सिंह, राजकुमार द्विवेदी, राधेश्याम, दिनेश कुमार, दलपत सिंह धुर्वे आदि।
स्थानीय संयोजक/व्यवस्थापक:
आशुतोष दीक्षित, राहुल दीक्षित, तुलसीदास शुक्ल, राजपाल सिंह यादव, बलवीर सिंह कठेरिया, गंभीर सिंह यादव, अजय मिश्रा, ब्रजकिशोर, उमेश दुबे, प्रेम कुमार शके, श्रीनाथ बाथम, सिद्धनाथ यादव, बिक्रम सिंह यादव, रामावतार सिंह यादव, नरेशचंद यादव, टीटू यादव, दिलीप यादव, संटू यादव, बबलू यादव।
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