आजादी आंदोलन की विरासत,सद्भावना,लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की हिफाजत व मजबूती के लिए आज सुबह सर्व धर्म प्रार्थना के साथ यात्रियों की दिनचर्या का आरंभ हुआ। इसके बाद यात्री दल के साथी दोपहर में राजकीयकृत उच्च माध्यमिक विद्यालय वीर ओईयारा धनरूआ पहुंचे। 19 मार्च 1947 को महात्मा गांधी आसपास के क्षेत्रों में फैले साम्प्रदायिक उन्माद को रोकने के उद्देश्य से इस जगह रुके थे। यहां एक सभा का आयोजन हुआ । स्कूल की प्रभारी प्राचार्या सुनीता कुमारी ने सभी का स्वागत किया।
सभा के दौरान यात्रा के आयोजक अशोक भारत ने यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पटना स्थित चरखा समिति (लोकनायक जयप्रकाश नारायण का आवास) से शुरू हुई ‘जहां पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ यात्रा 22 तारीख को चंपारण के गांधी आश्रम, भितिहरवा पहुँचेगी। इस यात्रा का उद्देश्य महात्मा गांधी के पदचिन्हों पर चलकर उनके सत्य और अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना तथा देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है। चंपारण ऐतिहासिक रूप से वही भूमि है जहाँ गांधीजी ने नील की खेती की तिनकठिया प्रथा और जमींदारों के अन्यायपूर्ण करों के खिलाफ सत्याग्रह कर किसानों को निर्भय बनाया और त्यागी कार्यकर्ताओं की ऐसी पीढ़ी तैयार की जिसने आजादी के आंदोलन को नई दिशा दी। आज जब देश के लोकतंत्र, संविधान और आजादी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं तथा बुलडोजर राज जैसी प्रवृत्तियाँ और बाहरी हस्तक्षेप चुनौतियाँ पैदा कर रहे हैं, तब गांधीजी के सत्य, अहिंसा और समानता के सिद्धांतों को पुनः जनचेतना का आधार बनाना जरूरी है। इस यात्रा में बिहार, झारखंड, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होकर गांधीवादी मूल्यों के आधार पर एक प्रगतिशील और संवैधानिक भारत के निर्माण का संकल्प दोहरा रहे हैं।
उसके बाद यात्रा दल ने नवरंगाबाद स्थित बुनियादी विद्यालय और गांधी स्मृति आश्रम का परिगमन किया। सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता जितेंद्र राम द्वारा सभी का स्वागत किया गया । स्थानीय लोगों ने बताया कि जब गांधी 18–21 मार्च को मसौढ़ी आए थे, उसी दौरान वे इस जगह भी आए थे। उन्हीं की स्मृति में यह स्कूल बनाया गया। लोगों ने इस बात पर दुख प्रकट किया कि इस ऐतिहासिक आश्रम और विद्यालय को सरकार द्वारा कोई सहायता नहीं मिल रही है, जिसके कारण विद्यालय की स्थिति दयनीय हो गई है। आश्रम की जमीन पर भी जबरन कब्ज़ा करने की कोशिश की जा रही है।
नवरंगाबाद में बुनियादी विद्यालय परिसर में दोपहर के भोजन के बाद यात्रा धनरूआ प्रखंड के हज़रत साईं गांव पहुंची। इस जगह पर गांधी जी मार्च 1947 में पहुंचे थे। इस दौरान एक सभा का आयोजन किया गया। सभी यात्रियों का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया।
सभा के दौरान गांव के निवासी मशकूर करीम ने गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां ईद के दौरान हिंदू परिवारों की ओर से मुसलमानों को दूध और शक्कर दिया जाता है। वहीं होली के समय मुसलमान हिंदू परिवारों को दावत देते हैं। उन्होंने बताया कि 1947 में जब गांधी जी यहां आए थे, तब भी यहां के लोगों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि हम सभी मिल-जुलकर रहेंगे। यह परंपरा आज भी कायम है और यही असली हिंदुस्तान है। अंत में सरपंच कौशल कुमार ने सभी को धन्यवाद दिया।
इसके बाद यात्रा ऐतिहासिक गांधी मैदान पहुँची। यह वही स्थान है जहाँ महात्मा गांधी ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कौमी एकता का आह्वान किया था, जिसकी मिसाल आज भी कायम है। यहाँ होली मिलन समारोह की अध्यक्षता मुसलमान करते हैं, जबकि ईद मिलन समारोह की अध्यक्षता हिंदू करते हैं।
यहाँ महात्मा गांधी और भगत सिंह की प्रतिमाओं पर यात्रियों द्वारा माल्यार्पण किया गया। इसके बाद एक सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि आज ट्रंप जैसे नेता यह कहते हैं कि उनकी सहमति से ही हम तेल खरीद सकते हैं, और हमारी सरकार इसका विरोध भी नहीं करती । यह गांधी के स्वराज के विचारों के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने आगे कहा कि आज हम फिर एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़े हैं। यदि सच्ची आज़ादी और स्वाभिमान को कायम रखना है, तो हमें महात्मा गांधी के रास्ते पर चलना होगा।
स्वतंत्र पत्रकार मृत्युंजय पेरियार ने कहा कि सोशल मीडिया पर एप्सटीन फाइल से जुड़ा एक पोस्ट करने के कारण दिल्ली पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी की गई। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने हमें यह प्रेरणा दी है कि भय के बिना सच के लिए खड़े रहना चाहिए। वे गांधी के पदचिन्हों पर चलते हुए सत्य और न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी कठिनाइयों का सामना क्यों न करना पड़े।
आज यात्रा का अंतिम पड़ाव मध्य विद्यालय हांसाडीह रहा। इसी स्थान पर महात्मा गांधी 21 मार्च 1947 को पहुँचे थे। इस ऐतिहासिक क्षण की स्मृति में यहाँ गांधी जी की प्रतिमा स्थापित की गई है, जहाँ सभी यात्रियों ने माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।इस अवसर पर सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने सभी स्थानीय आयोजकों और सहयोगियों को धन्यवाद दिया ।
नारायणपुर गांव में एकता परिषद् के कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किया गया। एकता परिषद् के कार्यकर्ताओं ने नौबतपुर प्रखंड के 40 गांवों की 1700 महिलाओं के नाम से जमीन का पट्टा दिलाने का कार्य किया है।
आज की दिनभर की यात्रा के आयोजन में किसान नेता उमेश, जितेंद्र राम, रमा रंजन , शिव पूजन सिंह, मोहम्मद अवसाद शाहिद, टीपू सुल्तान, कौशल कुमार आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा ।
यात्रा 12 अप्रैल को हाजीपुर पहुंचेगी ।
यात्रा दल में शामिल साथी:
सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल,प्रबंधक ट्रस्टी शेख हुसैन, सचिव अरविंद अंजुम,उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज,संयुक्त किसान मोर्चा के नेता चौधरी राजेंद्र,सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरिन,यात्रा संयोजक अशोक भारत व प्रदीप प्रियदर्शी, बिहार प्रदेश लोक समिति शिवजी सिंह,लेखक पंकज कुमार श्रीवास्तव,हिमालय विजेता कीर्ति,सायकिल गर्ल शिवानी कुमारी,कबड्डी खिलाड़ी तनु वर्मा, वैज्ञानिक चेतना निर्माण कार्यकर्ता विकास कुमार,युवा सामाजिक कार्यकर्ता उमेश तूरी,मयूर,सौरभ सिंह,पर्यावरण कार्यकर्ता अनूप कुमार।
अशोक भारत
प्रदीप प्रियदर्शी
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